हसन मुश्रीफ के पुत्र नविद मुश्रीफ बने नए अध्यक्ष (सौजन्यः सोशल मीडिया)
कोल्हापुर: कोल्हापुर जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ यानी ‘गोकुल’ के अध्यक्ष पद को लेकर पिछले कई दिनों से जारी राजनीतिक घमासान अब समाप्त हो गया है। राज्य के वरिष्ठ नेताओं के हस्तक्षेप के बाद यह विवाद सुलझा और आज नविद मुश्रीफ को गोकुल के अध्यक्ष पद पर नियुक्त कर दिया गया।
नविद मुश्रीफ, राज्य के चिकित्सा शिक्षा मंत्री हसन मुश्रीफ के पुत्र हैं और गोकुल के संचालक मंडल में पहले से ही सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उनकी नियुक्ति को लेकर शुरू में कुछ आंतरिक असहमति थी, लेकिन अंततः सभी पक्षों की सहमति से उनके नाम पर मुहर लगाई गई।
पिछले कुछ दिनों से गोकुल के संस्थापक आनंदराव पाटील चुयेकर के पुत्र शशिकांत पाटील चुयेकर का नाम भी अध्यक्ष पद के लिए चर्चा में था। लेकिन राजनीतिक स्तर पर चली बैठकों और समझौते के बाद नविद मुश्रीफ का नाम सामने आया।
गुरुवार को जिला बैंक के अध्यक्ष कक्ष में करीब ढाई घंटे तक चली बैठक में वरिष्ठ नेताओं ने संभावित नामों पर विचार कर अंतिम निर्णय लिया। यह नाम बंद लिफाफे में गोकुल के वरिष्ठ संचालक और पूर्व अध्यक्ष विश्वास पाटील को सौंपा गया था। शुक्रवार को लिफाफा खोला गया और नविद मुश्रीफ के नाम की औपचारिक घोषणा की गई।
इस पूरे घटनाक्रम में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की भूमिका निर्णायक रही। अध्यक्ष पद पर सहमति से नाम तय करने से पहले अरुण डोंगळे ने साफ कहा था कि वे इस्तीफा तभी देंगे जब मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री की ओर से स्पष्ट संदेश मिलेगा।
इस बीच, मंत्री हसन मुश्रीफ ने बताया कि उन्होंने दोनों शीर्ष नेताओं से मुलाकात कर वस्तुस्थिति साझा की थी और ऐसा नाम तय किया गया, जिसे सभी गुटों की स्वीकृति मिल सके।
महायुति की ओर से अध्यक्ष पद के लिए वरिष्ठ संचालक विश्वास पाटील, अजीत नरके, नविद मुश्रीफ और प्रो. किसन चौगले के नामों पर चर्चा हुई थी। हालांकि, विश्वास पाटील स्वयं इस पद के इच्छुक नहीं थे और पहले मंत्री मुश्रीफ ने कहा भी था कि नविद इस पद के लिए नहीं आएंगे। मगर हालात और सहमति के आधार पर आखिरकार नविद मुश्रीफ ही अध्यक्ष बनाए गए।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा था कि गोकुल का चेयरमैन महायुति का उम्मीदवार होना चाहिए। बता दें कि महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनावों से पहले, दूध को लेकर एक नई राजनीतिक लड़ाई छिड़ गई थी। यह रस्साकशी गोकुल मिल्क पर नियंत्रण पाने को लेकर थी, जिसे औपचारिक रूप से कोल्हापुर जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ के रूप में जाना जाता है, जो कि महाराष्ट्र की सबसे बड़ी डेयरी सहकारी संस्था है जो मुंबई और पुणे जैसे शहरों में बड़ी मात्रा में दूध की आपूर्ति करती है।