Nagpur Rural News: खापरखेड़ा क्षेत्र के बिनासंगम और भानेगांव के ग्रामीण पुनर्वासन की मांग को लेकर एकजुट हो गए हैं। भानेगांव ओपन कास्ट कोयला परियोजना से प्रभावित ग्रामीणों का 11 वर्षों से लंबित पुनर्वास अब आंदोलन का रूप ले चुका है। 18 मार्च से शुरू हुआ आमरण अनशन 20 मार्च को तीसरे दिन में प्रवेश कर गया।
ग्रामीणों का आरोप है कि वेकोलि (वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड) द्वारा सैकड़ों हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित किए जाने के बावजूद अब तक पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी नहीं की गई। नियमानुसार खदान शुरू होने से पहले पुनर्वास होना चाहिए था, लेकिन प्रशासनिक लापरवाही के चलते यह मामला वर्षों से अटका हुआ है।
खदान में होने वाली लगातार ब्लास्टिंग के कारण बिनासंगम और भानेगांव में घरों में दरारें पड़ चुकी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे हर दिन डर के साये में जीवन जीने को मजबूर हैं।
यह क्षेत्र चंद्रशेखर बावनकुले के निर्वाचन क्षेत्र में आता है। पुनर्वास के लिए दहेगांव रंगारी और रनाला क्षेत्र में जमीन तय की गई थी, लेकिन वेकोलि द्वारा आवश्यक राशि जमा न किए जाने से प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।
आंदोलन को विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों का समर्थन मिल रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता भिवा तांडेकर के नेतृत्व में ग्रामीण आमरण अनशन पर बैठे हैं। उनका कहना है कि “न्याय मिलने तक आंदोलन जारी रहेगा।”
सूत्रों के अनुसार बिनासंगम के सरपंच नारायण भडंग ने भी पहले अनशन की घोषणा की थी, लेकिन बाद में वे पीछे हट गए। अब आंदोलन के और उग्र होने की संभावना जताई जा रही है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए, तो 22 मार्च से गांववासी श्रृंखलाबद्ध उपोषण शुरू करेंगे। आंदोलन स्थल पर अब तक कोई वरिष्ठ अधिकारी नहीं पहुंचा, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी और बढ़ती जा रही है।