

Claim Regarding 5.8 million Kunbi Records: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर मराठा आरक्षण के मुद्दे ने प्रचंड रूप ले लिया है। जालना जिले के अंतरवाली सराटी गांव में पिछले एक हफ्ते से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे मराठा आंदोलनकारी मनोज जरांगे पाटिल ने सरकार के समक्ष झुकने से साफ इनकार कर दिया है। सरकार की ओर से भेजे गए उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ घंटों चली लंबी वार्ता विफल होने के बाद जरांगे ने आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है।
मनोज जरांगे ने दोटूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि 11 सितंबर तक मराठा समुदाय को आरक्षण देने की उनकी मांग पूरी नहीं की गई, तो यह विशाल आंदोलन मुंबई के मुख्य प्रशासनिक गलियारों तक पहुंचेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।
गुरुवार को महाराष्ट्र सरकार की ओर से मंत्रियों और विधायकों का एक प्रतिनिधिमंडल मनोज जरांगे से बातचीत करने पहुंचा। इस शिष्टमंडल में कैबिनेट मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल, उदय सामंत, एमएलसी प्रसाद लाड और विधायक मकरंद पाटिल शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल ने जरांगे के तेजी से गिरते स्वास्थ्य पर गहरी चिंता व्यक्त की।
मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनाेज जरांगे को अनशन समाप्त करने या कम से कम इसे कुछ समय के लिए स्थगित करने का विनम्र अनुरोध किया। मंत्रियों ने भरोसा दिलाया कि महायुति सरकार मराठा समुदाय के हितों की रक्षा और उन्हें कानूनी रूप से टिकाऊ आरक्षण दिलाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। हालांकि, जरांगे ने सरकार के इस आश्वासन को खारिज करते हुए अपनी हड़ताल जारी रखने का अडिग फैसला सुनाया।
बातचीत के दौरान सरकारी प्रतिनिधियों ने जानकारी दी कि प्रशासन ने अब तक राज्य में लगभग 58 लाख कुनबी जाति के ऐतिहासिक रिकॉर्ड खोज निकाले हैं। सरकार ने आश्वासन दिया कि इन रिकॉर्ड्स के आधार पर पात्र मराठा परिवारों को कुनबी प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया को अत्यंत तीव्र गति से आगे बढ़ाया जाएगा। इस पूरी कवायद पर नजर रखने और आवेदकों की समस्याओं के निपटारे के लिए विशेष नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की भी घोषणा की गई।
इसके जवाब में मनाेज जरांगे ने अपनी रणनीति और धारदार कर दी है। उन्होंने मराठा समुदाय के लोगों से अपील की है कि वे बिना समय गंवाए कुनबी जाति प्रमाण पत्र के लिए तुरंत औपचारिक आवेदन करना शुरू करें।
उल्लेखनीय है कि कुनबी समुदाय महाराष्ट्र राज्य में एक कृषि प्रधान वर्ग है, जो अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की सूची में आता है। कुनबी प्रमाण पत्र मिलने से मराठा समुदाय के लोगों को ओबीसी कोटे के तहत सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण का सीधा लाभ प्राप्त हो सकेगा। इसी अधिकार को छीनकर लेने की नीयत से जरांगे अपने कड़े रुख पर कायम हैं। देखना यह होगा कि 11 सितंबर की समयसीमा से पहले सरकार इस जलते मुद्दे का क्या समाधान निकालती है।