

Nagpur SIR Voter Deletion: मतदाता सूचियों के शुद्धिकरण के लिए चलाया गया विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) अभियान सोमवार, 17 अगस्त की मध्यरात्रि को समाप्त हो गया। जिला निर्वाचन विभाग के अनुसार, नागपुर जिले में कुल 46,38,589 मतदाताओं में से 14,26,106 मतदाताओं के आवेदन अब तक प्रशासन को प्राप्त नहीं हुए हैं।
ऐसे में इन मतदाताओं के नाम प्रारूप मतदाता सूची में शामिल होंगे या नहीं, यह 24 अगस्त को प्रकाशित होने वाली प्रारूप सूची से स्पष्ट होगा। अभियान के अंतिम दिन सोमवार रात 12 बजे तक SIR का पोर्टल खुला रहा। राज्य में यह अभियान 30 जून से शुरू हुआ था और समयसीमा दो बार बढ़ाई गई थी।
SIR अभियान के तहत बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) को प्रत्येक मतदाता के घर जाकर पंजीकरण फॉर्म उपलब्ध कराने और उसे भरवाकर जमा करने की जिम्मेदारी दी गई थी। इसके बाद प्राप्त फॉर्म को कंप्यूटरीकृत यानी डिजिटाइज किया जाना था।
जिला निर्वाचन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, नागपुर जिले में 31,88,930 मतदाताओं के आवेदन डिजिटाइज किए जा चुके हैं। वहीं, 23 हजार से अधिक आवेदन अभी डिजिटाइज होना बाकी बताए जा रहे हैं। निर्वाचन विभाग का कहना है कि इनमें से अधिकांश आवेदन प्रक्रिया में हैं और निर्धारित समय में उनका डिजिटाइजेशन पूरा कर लिया जाएगा।
सबसे बड़ा सवाल उन 14,26,106 मतदाताओं को लेकर है, जिनके आवेदन प्रशासन तक नहीं पहुंच पाए हैं। निर्वाचन विभाग के अनुसार, इस आंकड़े में दोहराए गए नाम, मृत मतदाता, दूसरे स्थानों पर प्रवास कर चुके मतदाता, घर पर नहीं मिले मतदाता तथा जिनका पता नहीं मिल सका ऐसे मतदाता शामिल हैं।
विशेष रूप से घर पर नहीं मिलने और पता नहीं मिलने वाले मतदाताओं की संख्या काफी अधिक बताई जा रही है। यही वजह है कि अंतिम मतदाता सूची में बड़ी संख्या में नामों को लेकर बदलाव की संभावना जताई जा रही है।
हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि इन सभी 14.26 लाख नामों को निश्चित रूप से मतदाता सूची से हटा दिया जाएगा। इन नामों की वास्तविक स्थिति 24 अगस्त को प्रकाशित होने वाली प्रारूप मतदाता सूची के बाद ही स्पष्ट होगी। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत मतदाताओं को दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर मिलेगा।
आंकड़ों के अनुसार, 14,26,106 ऐसे मतदाताओं में से 9,06,297 मतदाता नागपुर शहर के छह विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों से संबंधित हैं। मध्य नागपुर को छोड़कर शहर के अन्य पांच विधानसभा क्षेत्रों में करीब डेढ़-डेढ़ लाख मतदाताओं के आवेदन नहीं मिलने की बात सामने आई है।
सभी विधानसभा क्षेत्रों में ऐसे मतदाताओं की संख्या लगभग समान रहने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। इतने बड़े पैमाने पर मतदाताओं के आवेदन नहीं मिलने से निर्वाचन प्रक्रिया और BLO स्तर पर किए गए सत्यापन को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
SIR प्रक्रिया को लेकर कुछ मतदाताओं में नाराजगी भी सामने आई है। उनका कहना है कि ऐसे लोग भी प्रक्रिया से प्रभावित हो सकते हैं, जो नियमित रूप से मतदान करते रहे हैं, लेकिन उनका नाम वर्ष 2002 की मूल मतदाता सूची में नहीं है।
कुछ मतदाताओं का दावा है कि उनके नाम 2024 की मतदाता सूची में मौजूद थे और उन्होंने लोकसभा, विधानसभा तथा स्थानीय निकाय चुनावों में मतदान भी किया है। इसके बावजूद SIR प्रक्रिया के दौरान उन्हें अपना रिकॉर्ड साबित करने और संबंधित BLO की जानकारी हासिल करने में परेशानी का सामना करना पड़ा।
BLO की जानकारी नहीं मिलने से बढ़ी परेशानी
कुछ मतदाताओं का आरोप है कि उन्होंने अपना मतदाता पहचान पत्र, पिछले चुनावों में मतदान किए गए मतदान केंद्र और अन्य आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई। इसके बावजूद उनका सत्यापन नहीं हो पाया।
मतदाताओं का कहना है कि कई मामलों में उन्हें यह तक पता नहीं चल पाया कि उनके क्षेत्र का संबंधित BLO कौन है। ऐसे में समय पर आवेदन जमा नहीं होने या सत्यापन नहीं हो पाने के कारण वास्तविक मतदाताओं के नाम भी सूची से बाहर होने की आशंका पैदा हुई है।
फिलहाल 14.26 लाख मतदाताओं के नाम को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। 24 अगस्त को प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद ही पता चलेगा कि किन मतदाताओं के नाम सूची में हैं और किन नामों पर आपत्ति या सुधार की जरूरत है।
इसलिए जिन मतदाताओं को अपना नाम सूची में नहीं मिलने की आशंका है, उनके लिए प्रारूप सूची का प्रकाशन महत्वपूर्ण होगा। नाम छूटने की स्थिति में निर्धारित अवधि के भीतर दावा या आपत्ति दर्ज कराकर अपना पक्ष निर्वाचन विभाग के सामने रखा जा सकेगा।