

Manoj Jarange Fast Government Accepts Demands: महाराष्ट्र में चल रहे मराठा आरक्षण आंदोलन से इस वक्त की सबसे बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है। जालना जिले के अंतरवाली सराटी में पिछले पांच दिनों से आमरण अनशन पर बैठे मराठा आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटिल के आंदोलन को लेकर राज्य सरकार ने बेहद सकारात्मक और बड़ा कदम उठाया है।
बुधवार, 2 सितंबर की रात को सरकार के प्रतिनिधि के रूप में भाजपा विधायक प्रसाद लाड अंतरवाली सराटी पहुंचे और उन्होंने जरांगे पाटिल से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान सरकार की ओर से मनोज जरांगे पाटिल की सभी प्रमुख मांगें मान लेने का बड़ा आश्वासन दिया गया है।
आंदोलन स्थल पर पांच दिनों से भूखे-प्यासे बैठे मनोज जरांगे पाटिल की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए विधायक प्रसाद लाड ने उन्हें अनशन समाप्त करने और अपनी सेहत का ध्यान रखने के लिए पानी और सलाइन लेने का विशेष आग्रह किया।
प्रसाद लाड के काफी आग्रह और समझाइश के बाद, मनोज जरांगे पाटिल ने आखिरकार उनके हाथों से पानी पिया और शरीर में पानी की कमी को पूरा करने के लिए सलाइन लगवाने के लिए भी हामी भर दी। हालांकि, उन्होंने साफ कर दिया कि वे पानी पीने और सलाइन लेने के लिए भले ही सहमत हो गए हैं, लेकिन जब तक उनकी मांगों पर वास्तविक अमल शुरू नहीं हो जाता, वे अपना अनशन पूरी तरह से वापस नहीं लेंगे।
विधायक प्रसाद लाड ने मनोज जरांगे को विश्वास दिलाया कि 17 सितंबर को मनाए जाने वाले 'मराठवाडा मुक्तिसंग्राम दिवस' से पहले मराठा समाज की सभी समस्याओं का स्थायी समाधान कर दिया जाएगा और उन्हें अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के समान सभी आर्थिक व शैक्षणिक लाभ दिए जाएंगे।
लाड ने घोषणा की कि 3 सितंबर दोपहर 12 बजे से ही हैदराबाद गजट के आधार पर कुणबी प्रमाणपत्र बांटने की आधिकारिक प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। इस पर जरांगे पाटिल ने कहा कि अगर वास्तव में कल दोपहर से यह काम शुरू होता है, तो वे फूलों की वर्षा करेंगे।
इसके अलावा, प्रसाद लाड ने सरकार की ओर से कई अन्य महत्वपूर्ण घोषणाएं भी कीं, जिनमें आंदोलन के दौरान दर्ज हुए मामलों की वापसी शामिल है। उन्होंने बताया कि आंदोलन के दौरान दर्ज हुए कुल 1,376 मामलों में से अधिकांश मामले वापस ले लिए गए हैं और बाकी मामलों को तकनीकी व कानूनी प्रक्रिया के तहत वापस लेने की जांच चल रही है।
इसके साथ ही, वंशावली और कुणबी रिकॉर्ड खोजने वाली न्यायमूर्ति शिंदे समिति को एक और साल का सेवा विस्तार मिलेगा तथा मुंबई में उनके कामकाज के लिए 3,000 वर्ग फुट का कार्यालय दिया जाएगा। आरक्षण पर अंतिम फैसला आने तक किसी भी मराठा छात्र का दाखिला रद्द नहीं होगा और उनकी पूरी शैक्षणिक फीस का खर्च राज्य सरकार वहन करेगी।
अण्णासाहेब पाटील आर्थिक पिछड़ा विकास महामंडल के लिए रुकी हुई 300 करोड़ रुपये की शेष राशि भी तुरंत जारी की जाएगी। इसके अलावा, मराठा आरक्षण समिति के कामकाज के लिए मुंबई में 1,250 वर्ग फुट का स्वतंत्र कार्यालय स्थापित किया जाएगा जो सीधे मंत्रालय से समन्वय करेगा।
मनोज जरांगे ने साफ शब्दों में यह भी कहा कि मराठा समाज को ओबीसी वर्ग का 1 प्रतिशत आरक्षण भी नहीं चाहिए, लेकिन जिनके रिकॉर्ड मिल रहे हैं उन्हें प्रमाणपत्र मिलना ही चाहिए। उन्होंने कैबिनेट मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वे कभी सच नहीं बोलते और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे तथा मुख्यमंत्री फडणवीस के बीच दरार पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।
अपनी इस सकारात्मक प्रतिक्रिया के बावजूद मनोज जरांगे ने सरकार को कड़ी चेतावनी दी है और उन्हें केवल 4 दिनों का समय दिया है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि जिन चार छात्रों के कुणबी प्रमाणपत्र रद्द किए गए थे, उन्हें वापस दिए जाने और अन्य सभी मांगों के पूर्ण रूप से लागू होने के बाद ही वे अपना अनशन समाप्त करेंगे।