मंगेश साबले के 'तांडव आंदोलन' ने प्रशासन को हिला दिया, नारायण लोखंडे की भूख हड़ताल पांच दिन बाद खत्म

Mangesh Sable: मंगेश साबले के तांडव आंदोलन के बाद भोकरदन में नारायण लोखंडे और विकास जाधव की पांच दिन की भूख हड़ताल प्रशासन के लिखित आश्वासन पर समाप्त हुई।
मंगेश साबले के 'तांडव आंदोलन' ने प्रशासन को हिला दिया
मंगेश साबले के 'तांडव आंदोलन' ने प्रशासन को हिला दिया (सौजन्यः सोशल मीडिया)
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Bhukh Hadatal Bhokardan: भोकरदन तहसील कार्यालय के कैंपस में पिछले पांच दिनों से चल रही सोशल एक्टिविस्ट नारायण लोखंडे और विकास जाधव की भूख हड़ताल आखिरकार प्रशासन के लिखित आश्वासन के बाद समाप्त कर दी गई। फुलंबरी के सोशल एक्टिविस्ट मंगेश साबले की मौजूदगी में और भोकरदन के ग्रुप डेवलपमेंट ऑफिसर वाई. एस. वेणीकर के लिखित आश्वासन के बाद भूख हड़ताल खत्म की गई। इस मौके पर भोकरदन के तहसीलदार ज्ञानेश्वर काकड़े भी उपस्थित थे।

भूख हड़ताल समाप्त करने से पहले, मंगेश साबले ने प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए अनोखा तरीका अपनाया। उन्होंने हाथ में ढोल लेकर और मटके के राजा का वेश बनाकर तहसील कार्यालय और सड़कों में तांडव किया और अधिकारियों को जगाया।

कर्मचारियों को उनके मूल पदों पर भेजा जाए

नारायण लोखंडे और विकास जाधव ने किसानों की अलग-अलग मांगों को लेकर यह भूख हड़ताल शुरू की थी। मुख्य मांग थी कि भोकरदन पंचायत समिति के तहत पर्सनल बेनिफिट स्कीम के अंतर्गत कुओं के काम के लिए टाली गई मस्टर शुरू की जाए और संबंधित लाभार्थियों को तुरंत भुगतान किया जाए। इसके अलावा, भूख हड़ताल करने वालों ने यह भी मांग की कि डेपुटेशन पर लगे कर्मचारियों को उनके मूल पदों पर भेजा जाए।

अब तक हुई कार्रवाई पर चर्चा

26 तारीख को फुलंबरी के सोशल एक्टिविस्ट मंगेश साबले भोकरदन पहुंचे। उन्होंने सबसे पहले भूख हड़ताल कर रहे लोगों से मुलाकात की और हालात की विस्तार से जानकारी ली। इसके बाद, डफ बजाते हुए, वे सभी कर्मचारियों के साथ तहसील कार्यालय गए और तहसीलदार से मिले। भूख हड़ताल की मांगों और अब तक हुई कार्रवाई पर चर्चा की गई। इसके बाद पंचायत समिति कार्यालय जाकर ग्रुप डेवलपमेंट ऑफिसर और संबंधित अधिकारियों से भी चर्चा की गई और मांगों को तुरंत हल करने की मांग की गई।

मंगेश साबले के हस्तक्षेप के बाद प्रशासन ने सकारात्मक रुख अपनाया। ग्रुप डेवलपमेंट ऑफिसर और तहसीलदार खुद भूख हड़ताल की जगह पर आए और लिखित आश्वासन दिया। इसके बाद नारायण लोखंडे और विकास जाधव ने अपनी भूख हड़ताल वापस ले ली। उस समय बड़ी संख्या में सोशल एक्टिविस्ट और किसान उपस्थित थे।

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