जालना मनपा बैठक में हंगामा, सभागृह के नामकरण पर सियासी घमासान; 7 प्रस्तावों को मिली मंजूरी
Jalna Municipal Corporation Meeting: जालना मनपा की विशेष बैठक में हंगामे के बीच 9 में से 7 प्रस्ताव मंजूर, सभागृह के नामकरण को लेकर राजनीतिक विवाद तेज।
- Written By: अंकिता पटेल
Jalna Political Dispute Maharashtra ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Jalna Political Dispute Maharashtra: जालना मनपा की बीते दिन आयोजित विशेष बैठक कई कारणों के चलते चर्चा का विषय बनी रही। बैठक बुलाने की प्रक्रिया, एजेंडे में अपर्याप्त जानकारी व अन्य मुद्दों को लेकर पदाधिकारियों ने अधिकारियों को आड़े हाथों लिया।
इस बीच, आरोप-प्रत्यारोप के बीच 9 में से 7 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। महापौर को राजदंड एक घंटे की देरी से सौंपने पर नगरसेवकों ने प्रशासनिक नियोजन पर भी तीखी टिप्पणियां की।
महापौर वंदना मगरे की अध्यक्षता में आयोजित विशेष बैठक में उपमहापौर राजेश राऊत, विभिन्न समितियों के सभापति, नगरसेवक उपस्थित रहे। शुरुआत में ही बैठक किसने कहने पर बुलाई गई, पर भ्रम की स्थिति बन गई।
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मनपा की प्रशासनिक इमारत के नए सभागृह को दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का नाम देने का प्रस्ताव सदन में रखा गया। इस पर शिंदे सेना की दर्शना खोतकर झोल व अन्य नगरसेवकों ने समिति की बैठक में दिवंगत बालासाहेब ठाकरे का नाम देने की लिखित सिफारिश का हवाला दिया, सत्ता पक्ष ने ठाकरे के नाम का विरोध दर्ज कराया।
शहर में निकलने वाले ठोस कचरा प्रबंधन पर की गई चर्चा
चचाँ के बाद यह प्रस्ताव स्वीकृत किया गया। केंद्र सरकार, राज्य सरकार व वार्षिक नियोजन समिति के अंतर्गत विभिन्न विकास कार्यों के प्रस्ताव तैयार कर भेजने के मुद्दे पर सत्ता पक्ष व विपक्ष दोनों के नगरसेवकों ने प्रशासनिक कामकाज की खुलकर आलोचना की, मतभेद उभरने के चलते गुंठेवारी का विषय का प्रस्ताव लंबित रखा गया, गोपीनाथ मुंडे चौक का सौदयीकरण, ठोस कचरा प्रबंचन परियोजना संग कुल 7 प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए बैठक शुरू होने पर नगरसेवकों को केवल एक पृष्ठ का एजेंडा थमाया गया, जिसमें 9 विषयों का उल्लेख था। हर विषय पर विस्तृत जानकारी का सर्वथा अभाव होने से कई नगरसेवकों ने पूछा कि आखिर यह विशेष बैठक किस उद्देश्य से बुलाई गई।
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समस्याओं के शीघ्र समाधान का वादा
शहर में जल वितरण व स्वच्छता की समस्याओं को लेकर स्थायी समिति के अध्यक्ष अशोक पांगारकर, अक्षय गोरंट्याल संग अन्य पदाधिकारियों ने आक्रामक रवैया अपनाते हुए प्रशासनिक अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया। महापौर व अधिकारियों ने समस्याओं के शीघ्र समाधान का वादा किया।
