जालना में एसीबी का जाल, मुआवजा दिलाने के नाम पर सिंचाई विभाग का इंजीनियर रिश्वत लेते गिरफ्तार
Jalna News: जालना में एसीबी ने सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता रोहित देशमुख को भूमि अधिग्रहण मुआवजे की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के बदले 1 लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया।
- Written By: आकाश मसने
कॉन्सेप्ट फोटो (सोर्स: AI)
Jalna Bribery Case: महाराष्ट्र के जालना जिले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने लघु सिंचाई विभाग में तैनात एक वरिष्ठ अधिकारी को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। एसीबी अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई गुरुवार को की गई। आरोपी अधिकारी पर भूमि अधिग्रहण के मुआवजे की फाइल आगे बढ़ाने के लिए किसान से रिश्वत मांगने का आरोप है।
एसीबी के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए अधिकारी का नाम रोहित प्रल्हाद देशमुख (35) है, जो लघु सिंचाई विभाग में कार्यकारी अभियंता के पद पर कार्यरत है। उसे उसके ही कार्यालय में एक लाख रुपये की रिश्वत स्वीकार करते समय पकड़ा गया। यह कार्रवाई शिकायतकर्ता किसान की सूचना के आधार पर की गई।
सात लाख रुपये की मांग का आरोप
शिकायत के अनुसार, सरकार ने एक किसान की कृषि भूमि का अधिग्रहण किया था। इस भूमि के मुआवजे की प्रक्रिया पूरी कराने के बदले आरोपी अधिकारी ने किसान से कुल सात लाख रुपये की मांग की थी। किसान ने मजबूरी में पहले चार लाख रुपये का भुगतान कर दिया था।
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मुआवजा मिलने के बाद बढ़ी प्रताड़ना
अधिकारियों ने बताया कि पिछले साल जुलाई में किसान के बैंक खाते में 1.88 करोड़ रुपये का मुआवजा जमा हुआ। इसके बाद आरोपी अधिकारी ने शेष रकम की मांग को लेकर किसान को लगातार परेशान करना शुरू कर दिया। इतना ही नहीं, ‘गांवठाण’ क्षेत्र में स्थित किसान के घर से जुड़े मुआवजे के लिए भी आरोपी ने दबाव बनाया।
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खाली चेक लेने का भी आरोप
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) के अनुसार, आरोपी अधिकारी ने किसान से खाली चेक भी ले लिए थे, ताकि ‘गांवठाण’ से संबंधित मुआवजे की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके। लगातार हो रही प्रताड़ना से तंग आकर किसान ने आखिरकार एसीबी से संपर्क किया।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई
एसीबी ने जाल बिछाकर अधिकारी को एक लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए पकड़ लिया। आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज करने की प्रक्रिया जारी है। एसीबी की इस कार्रवाई से जिले में हड़कंप मच गया है और प्रशासनिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है।
