

INDIA Alliance Meeting Delhi: दिल्ली में राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी एकजुटता को मजबूत करने के लिए इंडिया गठबंधन के शीर्ष नेताओं का महामंथन चल रहा है। इस बैठक में नीट (NEET) पेपर लीक मामला, बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी जैसे गंभीर जनहित के मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की जा रही है। हालांकि, अरविंद केजरीवाल, एमके स्टालिन और सीपीएम के कुछ प्रमुख नेताओं की अनुपस्थिति को लेकर कयासबाजी का दौर भी गर्म है। इस पूरे परिदृश्य पर मुंबई से प्रतिक्रिया देते हुए शिवसेना (UBT) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने कहा कि गठबंधन के कुछ साथियों में नाराजगी और मनमुटाव होना एक स्वाभाविक पारिवारिक बात है।
आनंद दुबे ने साफ किया कि जहां चार बर्तन होते हैं, वहां उनके बजने की आवाज आना लाजिमी है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि गठबंधन कमजोर है।
क्षेत्रीय दलों की अनदेखी के सवाल पर आनंद दुबे ने बेहद बेबाकी से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि इंडिया गठबंधन में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी है, उसके पास सीटें अधिक हैं और राहुल गांधी स्वयं नेता प्रतिपक्ष हैं। दुबे ने सीधे शब्दों में कहा, "प्रधानमंत्री तो राहुल गांधी को ही बनना है, प्रधानमंत्री हमें या किसी अन्य क्षेत्रीय दल को तो बनना नहीं है।" उन्होंने कांग्रेस को सलाह दी कि वह बड़ा दिल दिखाते हुए राज्यों में मजबूत क्षेत्रीय दलों को प्रमोट करे। जब कांग्रेस क्षेत्रीय दलों को उनका हक देगी, तो बदले में सभी क्षेत्रीय दल भी पूरी ताकत से राहुल गांधी को देश के प्रधानमंत्री के रूप में प्रमोट करेंगे।
उद्धव गुट के प्रवक्ता ने देश के राजनीतिक ढांचे को रेखांकित करते हुए कहा कि क्षेत्रीय दलों का अपना एक निश्चित दायरा होता है। वे राष्ट्रीय स्तर के बजाय अपने-अपने राज्यों में जमीनी स्तर पर अधिक सक्रिय और प्रभावी होते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि हमारी शिवसेना चाहती है कि महाराष्ट्र में जब भी मौका मिले, मुख्यमंत्री का पद हमें मिले। इसी तरह तमिलनाडु में डीएमके, दिल्ली-पंजाब में आम आदमी पार्टी, बंगाल में टीएमसी, यूपी में समाजवादी पार्टी और झारखंड में हेमंत सोरेन की जेएमएम अपने राज्यों में नेतृत्व चाहती है। अगर इन क्षेत्रीय ताकतों को दबाया जाएगा, तो गठबंधन जमीनी स्तर पर काम नहीं कर पाएगा।
आनंद दुबे ने कांग्रेस की गठबंधन नीति पर भी गंभीर सवाल उठाए और इसे पूरे देश में एक समान रूप से लागू करने की वकालत की। उन्होंने दोटूक लहजे में कहा कि कांग्रेस पार्टी को यह सोचना होगा कि अगर वे गठबंधन का हिस्सा हैं, तो उन्हें हर जगह पूरी प्रतिबद्धता के साथ मिलकर चुनाव लड़ना होगा। आप उत्तर प्रदेश में तो गठबंधन करेंगे लेकिन बिहार में नहीं करेंगे, ऐसा दोहरा मापदंड नहीं चल सकता। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि विपक्ष ने हर राज्य में एकजुट होकर चुनाव नहीं लड़ा और सीटों का सही तालमेल नहीं किया, तो आगामी समय में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को शिकस्त देना बेहद मुश्किल हो जाएगा।