गुलियन-बैरे सिंड्रोम के लक्षण दिखते ही सरकारी अस्पताल का रूख करें मरीज, पालक मंत्री पाटील ने की अपील
महाराष्ट्र के पुणे में गुलियन बैरे सिंड्रोम के मरीज बढ़ते ही जा रहे है। इसे देखते हुए राज्य के बाकी जिलों ने भी सावधानी के सारे इंतजाम कर लिए है। इस दौरान गुलाबराव पाटिल ने जनता से अपील की है।
- Written By: प्रिया जैस
गुलाबराव पाटील ने मरीजों से की मुलाकात (सौजन्य-नवभारत)
जलगांव: महाराष्ट्र के जलगांव में 45 वर्षीय महिला को गुलियन-बैरे सिंड्रोम (जीबीएस) नामक दुर्लभ न्यूरोलॉजिकल विकार का पता चला है। सौभाग्य से उसकी हालत स्थिर है और उसे सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में उचित उपचार मिल रहा है।
इस मामले में सबसे खास बात यह है कि मरीज का कोई यात्रा इतिहास नहीं है, जो अक्सर जीबीएस मामलों में एक सामान्य कारक होता है। इससे कुछ चिंताएं पैदा हुई हैं, लेकिन अधिकारी स्थिति पर बारीकी से नज़र रख रहे हैं। मंत्री गुलाब राव पाटिल, जो जलगांव जिले के पालक मंत्री भी हैं, मरीज की स्थिति की जांच करने के लिए अस्पताल गए।
सरकारी अस्पताल का किया दौरा
उन्होंने नागरिकों से न घबराने की अपील की और उन्हें प्रोत्साहित किया कि अगर उनमें कोई लक्षण दिखाई दें तो वे सरकारी अस्पताल जाए। महाराष्ट्र में जीबीएस का यह पहला मामला सामने आया है और अधिकारी इसे और फैलने से रोकने के लिए सभी आवश्यक सावधानी बरत रहे हैं।
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मंत्री गुलाब राव पाटिल ने जलगांव में सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल का दौरा किया और गुलियन-बैरे सिंड्रोम (जीबीएस) से पीड़ित 45 वर्षीय महिला की स्थिति की जांच की। मंत्री को डॉ मारुति पोटे और न्यूरोलॉजिस्ट डॉ अभिजीत पिल्लई ने मरीज की स्थिति के बारे में जानकारी दी।
बिना यात्रा के भी दिखे लक्षण
इस मरीज ने यात्रा नहीं की है और उसे अपने घर पर सुन्नपन और कमजोरी के लक्षण महसूस होने लगे। उसके परिवार ने उसे तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया, ताकि समय पर चिकित्सा सुविधा मिल सके।वर्तमान में उसकी हालत स्थिर है और एक मेडिकल टीम उसके स्वास्थ्य पर बारीकी से नज़र रख रही है।
मंत्री पाटिल ने मेडिकल टीम को मरीज और उसके परिवार को आवश्यक उपचार और सहायता प्रदान करना जारी रखने का निर्देश दिया। उन्होंने मरीजों की निरंतर देखभाल सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन को तुरंत सूचित करने के महत्व पर भी जोर दिया।
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जीबीएस रोग के सामान्य लक्षण:-
1. पैरों या भुजाओं में अचानक कमज़ोरी/लकवा होना।
2. अचानक चलने में कठिनाई या कमजोरी।
3. दस्त (लंबे समय तक चलने वाला)
4. नागरिकों द्वारा बरती जाने वाली सावधानियां।
5. यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि पीने का पानी दूषित न हो। उदाहरण के लिए गर्म पानी करें।
6. भोजन स्वच्छ एवं ताज़ा होना चाहिए।
7. व्यक्तिगत स्वच्छता पर जोर दिया जाना चाहिए।
8. पके और कच्चे भोजन को एक साथ न रखकर भी संक्रमण को रोका जा सकता है।
