महायुति में सीट के लिए खींचतान, जलगांव सीट पर गुलाबराव पाटील और गिरीश महाजन आमने-सामने
Jalgaon Politics News: जलगांव स्थानीय स्वराज्य संस्था विधान परिषद चुनाव को लेकर महायुति में अंदरूनी संघर्ष तेज हो गया है। गुलाबराव पाटील अपने बेटे प्रताप पाटील के लिए टिकट की मांग कर रहे हैं।
- Written By: आंचल लोखंडे
Gulabrao Patil-Girish Mahajan (सौर्सः फाइल फोटो- सोशल मीडिया)
Jalgaon MLC Election: स्थानीय स्वराज्य संस्था विधान परिषद चुनाव ने जलगांव में महायुति के अंदर खुली सियासी जंग छेड़ दी है। इस बार मुकाबला सीधे गुलाबराव पाटील बनाम गिरीश महाजन का है। गुलाबराव अपने बेटे प्रताप पाटील को टिकट दिलाने के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं, जबकि गिरीश महाजन जलगांव सीट को भाजपा के पास बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, “एक को टिकट, बाकी को चॉकलेट” का फॉर्मूला तय है, लेकिन इस सीट का फैसला कई पुरानी राजनीतिक हिसाब-किताब बदल सकता है।
जिला पालकमंत्री गुलाबराव पाटील दिल्ली-मुंबई में लगातार लॉबिंग कर रहे हैं। वे चाहते हैं कि जलगांव सीट शिंदे गुट के खाते में रहे और उनके बेटे प्रताप पाटील को उम्मीदवारी मिले। पाटील परिवार ने इस बार बेटे के सियासी भविष्य पर सब कुछ दांव पर लगा दिया है।
गुलाबराव बनाम गिरीश महाजन की सियासी जंग
दूसरी ओर गिरीश महाजन के लिए यह लड़ाई प्रतिष्ठा की है। सूत्र बताते हैं कि महाजन ने पिछले कुछ वर्षों में कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को एमएलसी टिकट का झांसा देकर भाजपा में शामिल करवाया था। इनमें केतकी पाटील समेत कई प्रमुख चेहरे शामिल हैं। अब अगर जलगांव सीट शिंदे गुट को चली गई तो ये सभी इच्छुक भाजपाई के लिए ‘चॉकलेट’ साबित होंगे। टिकट की उम्मीद लगाकर आए नेता मायूस हो जाएंगे और महाजन की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो सकते हैं।
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दिल्ली-मुंबई में घमासान
पिछले 48 घंटों से दोनों गुटों के बीच मुंबई और दिल्ली में गुप्त बैठकें चल रही हैं। सीट शेयरिंग का फैसला देर रात या शुक्रवार तक आ सकता है। गिरीश महाजन जलगांव में भाजपा का दबदबा बनाए रखना चाहते हैं, जबकि गुलाबराव पाटील शिंदे गुट की ताकत बढ़ाना चाहते हैं।
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महाजन का ‘टिकट झांसा’ वाला दांव
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह जंग महज एक सीट की नहीं, बल्कि उत्तर महाराष्ट्र में शिंदे गुट और भाजपा के बीच वर्चस्व की लड़ाई है। अगर सीट शिंदे गुट के पास गई तो गिरीश महाजन के लिए बड़ा झटका होगा। कई भाजपा में आए नेताओं को टिकट का वादा पूरा न होने का अफसोस होगा।
‘एक सीट… कई नाराजगी’
टिकट से वंचित रहने वाले नेताओं को मनाने के लिए चॉकलेट बांटने की तैयारियां चल रही हैं, लेकिन गुलाबराव और गिरीश महाजन जैसे वरिष्ठ नेताओं के मामले में यह आसान नहीं होगा। अभी सबकी नजर दिल्ली-मुंबई के दरबार पर टिकी है कि आखिर कौन बाजी मारता है। गुलाबराव पाटील की पिता-पुत्र महत्वाकांक्षा या गिरीश महाजन का अनुभव फैसले पर सब की निगाहें टिकी है।
(इनपुटः वाहिद काकर, जलगांव )
