नागपुर की सुरक्षा पर सवाल! प्रवीण दटके बोले- अवैध होर्डिंग्स से बिगड़ रही शहर की सूरत, तुरंत हो कार्रवाई
Nagpur Illegal Hoardings: नागपुर में अवैध होर्डिंग्स और बिना अनुमति लगे मोबाइल टावरों को लेकर विधायक प्रवीण दटके ने सरकार से सख्त कार्रवाई, निरीक्षण और नियमों के कड़ाई से पालन की मांग की है।
- Written By: अंकिता पटेल
नागपुर, अवैध होर्डिंग्स, मोबाइल टावर,(सोर्स- नवभारत डिजाइन फोटो)
Nagpur Illegal Hoardings Mobile Towers: नागपुर शहर में बड़े पैमाने पर लगाए गए अनधिकृत होर्डिंग्स और बिना अनुमति वाले मोबाइल टावरों के कारण नागरिकों की सुरक्षा और शहर की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विधायक प्रवीण दटके ने इन ज्वलंत मुद्दों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए राज्य सरकार और प्रशासन से तत्काल सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।
अवैध होर्डिंग्स से शहर का हो रहा ‘सत्यानाश’
विधायक दटके ने आरोप लगाया है कि सिटी की मुख्य सड़कों, इमारतों और सार्वजनिक स्थानों पर बड़ी संख्या में अवैध होर्डिंग्स लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि ये होर्डिंग्स महाराष्ट्र नगर पालिका अधिनियम, बिल्डिंग बायलॉज और महाराष्ट्र विज्ञापन अधिनियम के नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए खड़े किए गए हैं।
इन अनधिकृत होर्डिंग्स के कारण न केवल शहर की सुंदरता बिगड़ रही है बल्कि यातायात अनुशासन और सार्वजनिक सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा पैदा हो गया है। दटके ने शहर के सभी अवैध होर्डिंग्स का तत्काल निरीक्षण कर उनकी सूची बनाने की मांग रखी।
सम्बंधित ख़बरें
महाराष्ट्र के 7444 गांवों में श्मशान नहीं! फडणवीस सरकार का बड़ा फैसला, अब इस शर्त के बिना नहीं मिलेगा फंड
नागपुर में दिल दहला देने वाली वारदात, स्टेशन छोड़ने के बहाने ऑटो में बैठाया, लूट के बाद मजदूर की हत्या
ठाणे में दर्दनाक हादसा: घोड़बंदर रोड पर ऑटो पर पलटा केमिकल टैंकर, 2 की मौत; कांदिवली में बावड़ी में डूबा मासूम
महाराष्ट्र में कुदरत का डबल अटैक! भारी बारिश के बीच हिंगोली, नांदेड़ और परभणी में 4 बार आया भूकंप
साथ ही उन्होंने इन सभी होर्डिंग्स को तुरंत हटाने, जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई करने और होर्डिंग्स के लिए बनाए गए नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने का आग्रह किया।
आधे से ज्यादा मोबाइल टावर अनधिकृत
अवैध होर्डिंग्स के अलावा सिटी में मोबाइल टावरों की स्थिति और भी खौफनाक है। दटके द्वारा दिए गए आंकड़ों के अनुसार सिटी में मौजूद कुल 862 मोबाइल टावरों में से 450 टावर पूरी तरह से अनधिकृत हैं। चौकाने वाली बात यह कि ये टावर निजी इमारतों पर बिना उनकी स्ट्रक्चर ऑडिट की जांच किए खड़े कर दिए गए है। इसके अलावा इन टावरों के लिए न तो अग्निशमन विभाग से अनुमति ली गई और न ही महानगर पालिका से एनओसी प्राप्त की गई।
कौन होगा जिम्मेदार ?
बिना सुरक्षा मानकों और एनओसी के इमारतों पर लगे इन अवैध टावरों ने आम नागरिकों की जान को सीधे तौर पर खतरे में डाल दिया है। दटके ने सरकार से कड़ा सवाल पूछा कि यदि शहर में कोई अनुचित या दुर्घटनापूर्ण घटना घटती है, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा? उन्होंने सरकार से अपील की कि नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए मोबाइल टावरों के संबंध में तत्काल एक स्पष्ट और सख्त नीति निर्धारित की जाए।
यह भी पढ़ें:-नागपुर में दिल दहला देने वाली वारदात, स्टेशन छोड़ने के बहाने ऑटो में बैठाया, लूट के बाद मजदूर की हत्या
सरकार के पास मोबाइल टावर नीति का अभाव
दटके ने राज्य में मोबाइल टावरो के लिए कोई स्पष्ट नीति न होने के मुद्दे को भी सदन में उठाया। उन्होंने याद दिलाया कि पिछले बजट सत्र में उन्होंने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए यह मुद्दा उठाया था।
उस समय मंत्री ने खुद सदन में स्वीकार किया था कि राज्य में मोबाइल टावरों को लेकर कोई नीति नहीं है और आश्वासन दिया था कि अगले सत्र से पहले यह नीति घोषित कर दी जाएगी। दटके ने सदन के संज्ञान में यह बात लाई कि दुर्भाग्यवश इतने समय बाद भी सरकार ने अभी तक कोई नीति नहीं बनाई।
