Nagpur Illegal Construction: नागपुर शहर में तेजी से बढ़ रहे अवैध और अनधिकृत निर्माण कार्यों पर कड़ा प्रहार करते हुए महानगरपालिका ने एक बड़ा कदम उठाया है। अब शहर में मंजूर नक्शे के अनुसार निर्माण पूरा होने के चाद बिल्डर और आर्किटेक्ट को नगर रचना विभाग (टाउन प्लानिंग विभाग) से 'ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट' लेना अनिवार्य कर दिया गया है। यह अहम फैसला मनपा की स्थापत्य व प्रकल्प (आर्किटेक्चर एंड प्रोजेक्ट) विशेष समिति की बैठक में लिया गया।
जानकारों की मानें तो इस तरह का नियम पहले से महानगरपालिका के कानून में स्थापित है किंतु अब तक सटीकता से इसका पालन नहीं हो रहा है। इस संदर्भ में विभाग के अधिकारियों का मानना है कि नियमों के अनुसार निर्माण कार्य किया जा रहा है या नहीं, यह देखना जोनल कार्यालय का कर्तव्य है। यहां तक कि जो बिल्डर निर्माण कार्य कर रहा है उसी ने काम पूरा होने के बाद आकर प्रमाणपत्र लेना है। अधिकारियों के इस अड़ियल रवैये के चलते शहर में बिना ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट के बिल्डरों ने जाल फैला रखा है।
मनपा के स्थायी समिति सभागृह में समिति की महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक के दौरान इस बात पर चिंता व्यक्त की कि अक्सर बिल्डर नगर रचना विभाग से नक्शा तो मंजूर करवा लेते हैं लेकिन निर्माण के दौरान उन प्रावधानों का उल्लंघन करके अतिरिक्त निर्माण कर लेते हैं जिससे शहर में अवैध निर्माण बढ़ता है। इसी गड़बड़ी और मनमानी पर लगाम कसने के लिए ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट को अनिवार्य करने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि समिति की ओर से कड़ा रुख तो अपनाया गया किंतु इस पर कितना अमल होगा, यह देखने लायक होगा।
समिति ने प्रशासन को सख्त रवैया अपनाने को कहा है। प्रशासन को निर्देश दिए है कि नगर रचना विभाग यह जानकारी तुरंत उपलब्ध कराए कि अब तक कितने नवशे मंजूर किए गए है और उसके एवज में कितने बिल्डरों ने ऑक्यूपेसी सर्टिफिकेट लिया है। सभी मंजूर नवशों की जानकारी प्रत्येक जीन कार्यालय को दी जाए, ताकि जोन के अधिकारी खुद जाकर यह जांच सकें कि काम मंजूर नक्शे के मुताबिक ही रहा है या नहीं। सबसे अहम निर्देश यह है कि यदि कोई निर्माण मंजूर नक्शे के विपरीत पाया जाता है तो संबंधित आर्किटेक्ट को ब्लैकलिस्ट' (काली सूची में डालने) की कार्रवाई की जाए।
बैठक में अवैध निर्माणों के खिलाफ सखा रुख अपनाया गया, अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि शहर में अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने के लिए जोन-वार (जोन के स्तर पर) अभियान चलाया जाए। इसके अलावा, शहर के विकास आराखडे (डेवलपमेंट प्लान डीपी। के तहत आरक्षित जगहों पर हुए अतिक्रमणों पर भी प्रत्येक जोन के अधिकारी तुरंत कार्रवाई करें।
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बैठक में चंद्रकांत खंगार, दुर्गेश्वरी कोसेकर, सुनीता तभाने, मुजतबा मुस्तफा अंसारी, नगर रचना विभाम के उपसंचालक गिरीश गोडबोले, सहायक संचालक ऋतुराज जाधव और सहायक आयुक्त स्तर के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।