मुंबई: कॉलेज में हिजाब-बुर्का बैन मामले पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, बॉम्बे HC के फैसले को चुनौती
सुप्रीम कोर्ट आज हिजाब से जुड़ी एक महत्वपूर्ण याचिका पर सुनवाई करेगा। उक्त याचिका कॉलेज के छात्रों ने बॉम्बे हाई कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ दायर की है, जिसमें मुंबई के एक निजी कॉलेज में हिजाब, नकाब, बुर्का, टोपी और इसी तरह के अन्य परिधान पहनने पर प्रतिबंध को सही करार देते हुए इसे बरकरार रखा था।
- Written By: राहुल गोस्वामी
(डिज़ाइन फोटो)
मुंबई: महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई के एक निजी कॉलेज में हिजाब पर लगे प्रतिबंध के एक मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होगी। इस याचिका में हिजाब पर प्रतिबंध बरकरार रखने के बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई है।
जानकारी दें कि मुंबई के एन. जी. आचार्य और डी. के. मराठे. कॉलेज के प्रशासन ने हिजाब, नकाब, बुर्का, स्टोल और टोपी पहनने पर कॉलेज परीसर में बैन लगाया हुआ है। इसको लेकर 9 लड़कियों ने पहले बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हालांकि बॉम्बे हाईकोर्ट ने उनकी याचिका को तब खारिज कर दिया था। इसके बाद अब सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को चुनौती दी गई है।
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याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील ने इस बाबत सुप्रीम कोर्ट से तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि कॉलेज जल्द ही शुरू हो जाएगा। ऐसे में मामले को प्राथमिकता से सुना जाना चाहिए। इस पर बीते गुरुवार को CJI ने कहा, “इस पर कल यानी शुक्रवार को सुनवाई होगी। मैंने इसे पहले ही सूचीबद्ध कर दिया है।”
दरअसल मुंबई के चेंबूर कॉलेज ने इस साल मई में एक नया ड्रेस कोड जारी हुआ था, जो जून में शुरू होने वाले शैक्षणिक वर्ष में ही लागू होना था।यह नोटिस तब लाया गया जब बीते अगस्त में ही कॉलेज में विवाद हुआ था, जब हिजाब पहनने वाली कई जूनियर कॉलेज की लड़कियों को कथित तौर पर निर्धारित यूनिफॉर्म का पालन न करने के कारण उन्हे प्रवेश से वंचित कर दिया गया था।
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यह सारा मामला तब हुआ जब बीते अगस्त में हिजाब पर लगे प्रतिबंध पर कॉलेज में विवाद हुआ था. तब हिजाब पहनने वाली कई जूनियर कॉलेज की लड़कियों को कथित तौर पर निर्धारित यूनिफॉर्म का पालन न करने के कारण प्रवेश से ही वंचित कर दिया गया था।
तब बंबई हाई कोर्ट ने ‘चेंबूर ट्रॉम्बे एजुकेशन सोसाइटी’ के एन जी आचार्य एवं डी के मराठे कॉलेज द्वारा हिजाब, बुर्के और नकाब पर प्रतिबंध लगाने के फैसले में हस्तक्षेप करने से बीते 26 जून को उस बाबत इनकार कर दिया था और कहा था कि ऐसे नियम छात्रों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं करते हैं। हाई कोर्ट ने कहा था कि ‘ड्रेस कोड’ का उद्देश्य दरअसल कॉलेज में अनुशासन बनाए रखना है, जो कि शैक्षणिक संस्थान की “स्थापना और प्रशासन” के लिए कॉलेज के मौलिक अधिकार का हिस्सा भी हैं।
बता दें कि कर्नाटक के उडुपी जिले के एक कॉलेज में बीते 31 दिसंबर 2021 को 6 मुस्लिम छात्राओं को हिजाब पहनने से ही रोक दिया गया था, जिसके बाद वे धरने पर बैठ गईं थीं। यह विवाद तब राज्य के बाकी हिस्सों में भी फैला था। इसके बाद हिंदू संगठनों से जुड़े छात्रों ने भी बदले में भगवा शॉल पहनकर कॉलेज आना शुरू कर दिया था। फिलहाल यह केस सुप्रीम कोर्ट में फैसले की राह देख रहा है।
