विदर्भ में 35 प्रजाति के पक्षी विलुप्ति के कगार पर! शिकार और पेड़ों की कटाई से घट रही संख्या
Bird Conservation: विदर्भ में पर्यावरण असंतुलन, पेड़ों की कटाई और औद्योगिकीकरण से 35 प्रजाति के पक्षी विलुप्ति के कगार पर। विशेषज्ञों ने पक्षी संवर्धन व जनजागृति की तत्काल जरूरत बताई।
- Written By: आकाश मसने
पक्षी (सोर्स: सोशल मीडिया)
Vidarbha Bird Species: विदर्भ में तेजी से बढ़ रहे औद्योगिकीकरण, पेड़ों की अंधाधुंध कटाई और नागरिकों की अनास्था ने क्षेत्र की जैव विविधता पर गहरा असर डाला है। पक्षी विशेषज्ञों के अनुसार, विदर्भ में पाई जाने वाली लगभग 415 पक्षी प्रजातियों में से 35 अब विलुप्ति के कगार पर हैं। अगर समय रहते इनके संरक्षण के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में ये पक्षी केवल तस्वीरों और किताबों में दिखाई देंगे।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि बढ़ते शहरीकरण और शिकार जैसी गतिविधियां पक्षियों के अस्तित्व को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही हैं। पक्षियों पर कीटनाशकों और विषैले रसायनों के उपयोग से भी उनका जीवन संकट में है। उन्होंने सुझाव दिया है कि वन विभाग, नागरिकों और पक्षी प्रेमियों को मिलकर जनजागृति अभियान चलाने की आवश्यकता है ताकि अतिसंवेदनशील श्रेणी वाले पक्षियों का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।
जलवायु परिवर्तन का प्रभाव
ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन का प्रभाव अब ऋतुचक्र पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। तापमान में असंतुलन और मौसम के असामान्य बदलाव ने चिड़िया, कबूतर, मैना और कौआ जैसे आम पक्षियों की जीवनशैली और प्रजनन प्रक्रिया को प्रभावित किया है। कई प्रवासी पक्षी अब पहले की तरह इस क्षेत्र में नहीं आ रहे हैं।
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विशेषज्ञों का कहना है कि अगर नागरिक अपने आस-पास आने वाले पक्षियों को आश्रय दें, उनके लिए दाना-पानी की व्यवस्था करें और पेड़ लगाने की दिशा में पहल करें, तो स्थिति में सुधार संभव है। अन्यथा विदर्भ का आकाश भी जल्द ही पक्षियों की चहचहाहट से खाली हो सकता है।
