तिरोड़ा में 50 साल पुराना आम का पेड़ जलाया गया, पर्यावरण प्रेमियों में आक्रोश
Green Environmen: तिरोड़ा में लघु सिंचाई विभाग के तालाब किनारे स्थित 50 वर्ष पुराने आम के पेड़ को असामाजिक तत्वों द्वारा आग लगाकर नष्ट करने से पर्यावरण प्रेमियों में भारी आक्रोश है।
- Written By: केतकी मोडक
गोंदिया में 50 साल पुराना जला हूआ आम का पेड़ (सोर्स - नवभारत)
50 Year Old Mango Tree Burnt In Gondia: गोंदिया जिले के तिरोड़ा शहर के गिरजाबाई स्कूल के पास स्थित लघु सिंचाई विभाग के तालाब के किनारे एक बेहद चौंकाने वाली और निंदनीय घटना सामने आई है। यहां करीब 50 वर्ष पुराने एक विशाल आम के पेड़ में अज्ञात असामाजिक तत्वों द्वारा जानबूझकर आग लगाकर उसे पूरी तरह से नष्ट कर दिया गया है। पर्यावरण और प्रकृति की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाने वाले इस ऐतिहासिक पेड़ की इस प्रकार की गई हत्या केवल एक पेड़ की हानि नहीं है, बल्कि यह पूरे स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को गंभीर रूप से प्रभावित करने वाला मामला है। यही मुख्य कारण है कि क्षेत्र के पर्यावरण प्रेमी और जागरूक नागरिक इस घटना पर अपनी कड़ी नाराजगी व्यक्त कर रहे हैं।
पक्षियों का प्राकृतिक आश्रय स्थल पल भर में हुआ खाक
तिरोड़ा शहर के गिरजाबाई स्कूल के समीप बने एक बड़े तालाब के किनारे खड़ा यह आम का पेड़ पिछले कई दशकों से इस पूरे क्षेत्र की जैव विविधता का एक अभिन्न अंग रहा है। कड़कड़ाती गर्मी के साथ-साथ अन्य सभी मौसमों में भी विभिन्न प्रजातियों के पक्षी इस घने पेड़ पर आकर विश्राम करते थे। यह पेड़ विशेष रूप से तालाब से पानी पीने के लिए आने वाले बेजुबान पक्षियों के लिए एक बेहद सुरक्षित और प्राकृतिक आश्रय के रूप में काम करता था।
लेकिन, समाज में सक्रिय कुछ विकृत और असामाजिक तत्वों ने इस खूबसूरत पेड़ के निचले हिस्से में चुपके से आग लगा दी, जिसके कारण यह विशाल पेड़ देखते ही देखते पूरी तरह जलकर नष्ट हो गया। चौंकाने वाली बात यह है कि यह पूरी घटना लघु सिंचाई विभाग के सीधे अधिकार क्षेत्र में हुई है, लेकिन इसके बावजूद संबंधित विभाग द्वारा अब तक इस संबंध में कोई ठोस कार्रवाई या प्राथमिक जांच शुरू नहीं की गई है।
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विभागीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल
इस उदासीनता के चलते अब संबंधित विभागीय अधिकारियों की पूरी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान खड़े होने शुरू हो गए हैं। तिरोड़ा शहर के नागरिकों ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि सरकारी संपत्ति के भीतर मौजूद पेड़ों की सुरक्षा के लिए जो यंत्रणा पूरी तरह जिम्मेदार है, उसने इस पूरे संवेदनशील मामले की जानबूझकर अनदेखी की है। जागरूक नागरिक अब प्रशासन से यह तीखा सवाल पूछ रहे हैं कि क्या इस गंभीर मामले की उच्च स्तरीय जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कोई आधिकारिक मामला दर्ज किया जाएगा या इसे ऐसे ही ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?
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नारेबाजी तक सीमित ‘पेड़ बचाओ’ अभियान
इस दुखद घटना पर अपनी तीव्र प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कई वरिष्ठ पर्यावरण प्रेमियों ने कहा कि एक तरफ जहां सरकार लगातार ‘पेड़ लगाओ, पेड़ बचाओ’ और ‘हरित महाराष्ट्र‘ जैसे बड़े-बड़े नारे दे रही है, वहीं दूसरी तरफ धरातल पर घटी यह घटना साफ बताती है कि खुद सरकारी परिसरों के भीतर ही पेड़ सुरक्षित नहीं हैं।
क्षेत्र के नागरिकों ने सामूहिक रूप से जिला प्रशासन से यह पुरजोर मांग की है कि इस घिनौने कृत्य को अंजाम देने वाले दोषियों का तुरंत पता लगाया जाए और उनके खिलाफ पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही, इस पूरे तालाब क्षेत्र की हरियाली की रक्षा के लिए प्रशासन द्वारा विशेष अभियान चलाकर यहां तत्काल प्रभाव से बड़े पैमाने पर नए पौधे लगाए जाने चाहिए।
