बिना शौचालय के चल रहीं शालाएं, प्रस्ताव ठंडे बस्ते में, प्रशासन की उदासीनता
Goregaon School: गोरेगांव तहसील की ज़िला परिषद शालाओं में शौचालयों की जर्जर अवस्था और प्रस्तावों को मंजूरी न मिलने से छात्र-छात्राएं परेशान। प्रशासन की उदासीनता पर पालकों की नाराजगी बढ़ी है।
- Written By: आंचल लोखंडे
बिना शौचालय के चल रहीं शालाएं
Gondia News: गोरेगांव तहसील की ज़िला परिषद शालाओं में शौचालय एक बड़ी समस्या बन चुका है। कुछ शालाओं में शौचालय जर्जर हालत में हैं, जबकि कई स्कूल बिना शौचालय के ही संचालित किए जा रहे हैं। ग्राम बघोली, चिचगांव, तानुटोला, डव्वा, गणखैरा, तुमखेड़ा, खाड़ीपार, कवलेवाड़ा, ईसाटोला, तेलनखेड़ी, पलखेड़ा सहित कई गांवों की स्थिति इसी प्रकार है। अन्य शालाओं में भी ऐसी ही परेशानियां दिखाई देती हैं।
शौचालयों की स्थिति इतनी दयनीय हो चुकी है कि छात्र उनका उपयोग तक नहीं कर पा रहे हैं। शाला प्रशासन कई बार शौचालय निर्माण के प्रस्ताव भेज चुका है, लेकिन शिक्षा विभाग में ये प्रस्ताव मंजूरी के बिना धूल खा रहे हैं। यह स्थिति स्वच्छ भारत अभियान के लक्ष्य के विपरीत है।
समय-समय पर मरम्मत नहीं
तहसील में कुल 108 प्राथमिक और वरिष्ठ प्राथमिक शालाएं हैं। निर्माण के दौरान शौचालय बनाए गए थे, लेकिन समय-समय पर मरम्मत नहीं होने के कारण लगभग 100 शालाओं के शौचालय जर्जर अवस्था में पहुंच चुके हैं। प्राथमिक शालाओं के लिए मात्र 5,000 रुपए और वरिष्ठ प्राथमिक शालाओं के लिए 25,000 रुपए सालाना फंड मिलता है, जिससे मरम्मत का खर्च निकाल पाना संभव नहीं है।
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स्वच्छ अभियान की उड़ी धज्जियां
जहां एक ओर प्रशासन स्वच्छ भारत अभियान पर लाखों रुपए खर्च कर रहा है, वहीं दूसरी ओर शालाओं में शौचालयों की बदहाली पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। प्रस्तावों को मंजूरी न मिलने से जिप स्कूलों में स्वच्छ भारत अभियान की पूरी तरह अवहेलना हो रही है। पालक वर्गों ने इस मुद्दे पर तत्काल ध्यान देने की मांग की है।
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प्रधानाध्यापकों ने निजी खर्च से की मरम्मत
कुछ प्रधानाध्यापकों ने स्वयं के खर्च से शौचालयों की मरम्मत कराई है। कुछ जगहों पर स्थानीय ग्राम पंचायत ने भी अपनी सामान्य निधि से सहयोग किया है। फिर भी अधिकांश प्रस्ताव विभाग में लंबित पड़े हैं और मंजूरी न मिलने से स्थिति जस की तस बनी हुई है।
