गोंदिया में पुराने कच्चे मकानों से बढ़ा हादसों का खतरा, बारिश में जर्जर मिट्टी के मकान बने खतरा
Dilapidated Houses: गोंदिया जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत नए मकानों का निर्माण तेजी से हो रहा है, लेकिन पुराने जर्जर मिट्टी के मकान अब भी खड़े हैं।
Dangerous Buildings (सोर्सः फाइल फोटो- सोशल मीडिया)
Gondia Rainy Season Risk: प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में घरकुल योजना के अंतर्गत लाभार्थियों को घर बनाने के लिए मंजूरी दी गई है। इसके अनुसार मानसून से पहले मकानों का निर्माण पूरा करने की होड़ मची हुई है। लेकिन, पुराने और जर्जर मिट्टी के मकान जस के तस रखे गए हैं, इसलिए मानसून के दौरान ये मकान खतरनाक होते जा रहे हैं। खेलते समय दीवार गिरने से बच्चों के घायल होने के कई उदाहरण हैं।
जर्जर मिट्टी के मकानों को तत्काल गिराने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर पहल करने की मांग की जा रही है। जिले के कई गांवों में अनुपयोगी जर्जर मिट्टी के मकान देखे जा रहे हैं। नए मकानों में जाने के बाद भी कई लोग अपने पुराने मकानों को वैसे ही छोड़ रहे हैं।
ग्रामीणों ने की कार्रवाई की मांग
मानसून से पहले लाभार्थियों द्वारा मकानों के निर्माण में तेजी लाई जा रही है। घरकुल योजना का लाभ लेते समय अधिकांश लाभार्थियों ने पुराने जर्जर मिट्टी के मकानों को वैसे ही रखा है। नए मकान में जाने के बाद लाभार्थी पुराने जर्जर मकान की ओर देखता भी नहीं है।
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इसके बाद जर्जर मकानों की दीवारों पर बारिश का पानी गिरने से दीवारें ढह रही हैं। ये मकान मानसून व अन्य मौसम में खतरनाक हो जाते हैं। इस कारण ऐसे अनुपयोगी मकानों को गिराना जरूरी हो गया है। लेकिन भारी बारिश के कारण कुछ ग्रामीण शासन से प्राप्त राशि का बंदरबांट करने के लिए ऐसे मकानों का निरीक्षण करने के बजाय उन्हें जस का तस रख देते हैं।
नए घर बने, पुराने खंडहर नहीं हटे
इससे खतरे की संभावना बनी रहती है। परिणामस्वरूप मांग की जा रही है कि ग्राम पंचायत प्रशासन इस ओर ध्यान दे और गांव में जर्जर मकानों का सर्वे कर संबंधितों को खतरनाक मकानों को गिराने के निर्देश दे। क्या ग्राम पंचायत हस्तक्षेप करेगी ग्राम पंचायत घरकुल लाभार्थियों को योजना का लाभ प्रदान करने वाली मुख्य स्थानीय स्वशासन संस्था है। गांव में घरकुल के निर्माण पर ग्राम पंचायत का नियंत्रण होता है।
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स्थानीय स्तर पर जीर्णशीर्ण और खतरनाक घरों की जांच करना ग्राम पंचायत की जिम्मेदारी है। घरकुल लाभार्थियों के पुराने जीर्णशीर्ण घरों को गिराने की पहल की जाए। ऐसा ग्रामीणों का कहना है। अगर ग्राम पंचायत अनदेखी करती है तो जानमाल के नुकसान से इनकार नहीं किया जा सकता है।
