3.5 लाख इनामी माओवादी का आत्मसमर्पण, नक्सली कोसा उइका ने छोड़ा हिंसा का रास्ता, थामा शांति का मार्ग

Naxalite Surrendered: गोंदिया में 3.5 लाख के इनामी माओवादी कोसा उइका ने जिलाधिकारी व एसपी के समक्ष आत्मसमर्पण किया। वर्षों तक दलम सदस्य रहकर कई हमलों में शामिल रहा।
3.5 लाख इनामी माओवादी का आत्मसमर्पण
3.5 लाख इनामी माओवादी का आत्मसमर्पण (सौजन्यः सोशल मीडिया)
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Gondia News: ₹3.5 लाख के इनामी एक खूंखार माओवादी ने जिलाधिकारी प्रजीत नायर और पुलिस अधीक्षक गोरख भामरे के समक्ष आत्मसमर्पण किया। आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी का नाम वर्गेश उर्फ कोसा मंगल उइका (26), मूल निवासी ग्राम तालुका कोंटा, जिला सुकमा (छ.ग.) है। वह बेदरे (पोस्ट जगरगुंडा) का रहने वाला तथा माओवादी दलम का सक्रिय सदस्य रहा है।

पुलिस अधीक्षक गोरख भामरे और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अभय डोंगरे के मार्गदर्शन में गोंदिया जिले में माओवादी आंदोलन को पूरी तरह समाप्त करने के लिए प्रभावी नक्सल विरोधी अभियान चलाया जा रहा है। साथ ही नागरिकों को शासन की कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देकर जागरूक करने हेतु विभिन्न गतिविधियाँ आयोजित की जा रही हैं।

आत्मसमर्पण की अपील

पुलिस द्वारा आत्मसमर्पण की अपील से प्रभावित होकर और माओवादी संगठन में हो रहे अत्याचारों व शोषण से तंग आकर, वर्गेश उर्फ कोसा मंगलू उइका ने 10 नवंबर को जिलाधिकारी एवं जिला पुलिस अधीक्षक के समक्ष आत्मसमर्पण किया। उइका का पैतृक गाँव सुकमा जिले के घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्र में स्थित है, जहाँ हथियारबंद वर्दीधारी माओवादियों का लगातार आना-जाना रहता था।

जगरगुंडा में लिया एक माह का प्रशिक्षण

माओवादियों के बहकावे और प्रलोभन में आकर वह बचपन से ही नक्सल आंदोलन से जुड़ गया और संगठन के निर्देशानुसार बाल संगठन में कार्य करने लगा। सितंबर 2016 में उसकी भर्ती जगरगुंडा दलम में की गई, जहाँ उसे एक माह का बुनियादी प्रशिक्षण दिया गया।

अक्टूबर 2016 में उसे दक्षिण गढ़चिरौली डिवीजन के भामरागढ़ एरिया कमेटी के पी.एल.7 दल में भेजा गया, जहाँ उसने लगभग दो माह तक काम किया। इसके बाद जनवरी 2017 से फरवरी 2020 तक वह गट्टा दलम से जुड़ा रहा।

मुख्यधारा में लौटने का निर्णय

फरवरी 2020 में उसे पुनः भामरागढ़ क्षेत्र में भेजा गया, जहाँ अप्रैल 2021 तक उसने भामरागढ़ दलम और चेतना नाट्य मंच (सीएनएम) में दलम सदस्य के रूप में कार्य किया।बताया गया है कि वह कई गंभीर नक्सली घटनाओं में शामिल रहा है। नक्सल आंदोलन के नाम पर वरिष्ठ कमांडरों की मनमानी, फंड की लूट, झूठे उद्देश्य और नीतियों के कारण उसने संगठन छोड़ने और मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया।

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