नवेगांव-नागझिरा अपडेट: एकीकृत नियंत्रण में आया 1,241 वर्ग किमी का क्षेत्र, जानें खेती पर क्या होगा असर
Navegaon Nagzira Buffer Zone: नवेगांव-नागझिरा बफर जोन विस्तार में 1,241 वर्ग किमी अधिसूचित। आदिवासी गांवों में रोजगार और वन उपज संग्रह को लेकर डर। प्रशासन से संवाद और स्पष्ट नक्शे की मांग।
- Written By: प्रिया जैस
गोंदिया बफर जोन (सौजन्य-नवभारत)
NNTR Buffer Zone Notification: नवेगांव-नागझिरा व्याघ्र आरक्षित क्षेत्र के प्रभावी संरक्षण और एकीकृत प्रशासनिक नियंत्रण के उद्देश्य से महाराष्ट्र शासन के राजस्व व वन विभाग द्वारा 26 दिसंबर को एक महत्वपूर्ण शासन निर्णय जारी किया। निर्णय के तहत गोंदिया व भंडारा के कुल 1,241.273 वर्ग किमी। क्षेत्र को नवेगांव-नागझिरा व्याघ्र परियोजना के बफर जोन के रूप में अधिसूचित किया है।
इस फैसले के बाद सड़क अर्जुनी तहसील के आदिवासी बहुल गांवों में असमंजस और चिंता का माहौल बन गया है। पशु चराई पर रोक से फसलों को भी नुकसान की आशंका है। अब तक गोंदिया-भंडारा उपवनसंरक्षक तथा भंडारा वन विकास महामंडल के प्रशासनिक नियंत्रण में रहे बफर क्षेत्र को नवेगांव नागझिरा व्याघ्र परियोजना के क्षेत्र संचालक के एकीकृत नियंत्रण में लाया गया है।
इस बफर क्षेत्र में गोंदिया प्रादेशिक वन विभाग के 419.894 वर्ग किमी।, भंडारा प्रादेशिक वन विभाग का 68.566 वर्ग किमी, वन विकास महामंडल का 139.514 वर्ग किमी तथा संरक्षित क्षेत्र में स्थित लेकिन कोर क्षेत्र में शामिल न किए गए 20.704 वर्ग किमी क्षेत्र को सम्मिलित किया गया है।
सम्बंधित ख़बरें
Gondia News: तिरोड़ा में मेमू ट्रेन बंद होने से यात्री और व्यापारी परेशान, सेवा बहाल करने की मांग
Gondia News: रावणवाड़ी ट्रक लूट मामले का खुलासा, पुलिस ने आरोपी को किया गिरफ्तार
Gondia News: गोंदिया पुलिस का साइबर ठगी पर शिकंजा, म्यूल बैंक खातों के खिलाफ विशेष अभियान शुरू
गोंदिया में NEET विवाद और सोनम वांगचुक के समर्थन में बड़ा प्रदर्शन, जिला भर में गूंजी विरोध की आवाज
जंगल पर आधारित आजीविका
इस बफर जोन विस्तार अंतर्गत सड़क अर्जुनी के जांभली, दोडके और लोधीटोला जैसे आदिवासी बहुल गांवों से सटे जंगल क्षेत्र का बड़ा हिस्सा शामिल होने से स्थानीय नागरिकों में चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी पारंपरिक आजीविका का बड़ा हिस्सा जंगल पर आधारित है।
महुआ फूल, तेंदूपत्ता, अन्य वन उपज का संग्रह, पशु चराई, जलाऊ लकड़ी और जंगल से जुड़े छोटे व्यवसाय ही उनके जीवनयापन का मुख्य साधन हैं। ग्रामीणों को आशंका है कि बफर जोन घोषित होने के बाद इन गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
यह भी पढ़ें – गोंदिया में मौत बनकर घूम रहा तेंदुआ! घरों में कैद हुए लोग, नंगपुरा मुर्री में दिखा मूवमेंट
शंकाओं का समाधान करें
जंगल से सटी कृषि भूमि पर भी नियंत्रण बढ़ने, अतिक्रमित खेतों पर कार्रवाई, पशु चराई पर रोक और वन्यजीवों की संख्या बढ़ने से फसलों के नुकसान की समस्या गंभीर होने की संभावना जताई जा रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि बफर जोन के विस्तार से पहले स्थानीय ग्राम पंचायतों और नागरिकों के साथ संवाद स्थापित कर उनकी शंकाओं का समाधान किया जाए।
प्रशासन साफ नक्शे की जानकारी दें
घर में जलाने की लकड़ी पर रोक लगेगी, कुल्हाड़ी पर रोक, मवेशी चराने पर रोक, जंगल से महुआ फुल इकट्ठा करने पर रोक, और जंगल से होने वाली आय बंद हो जाएगी। अगर जंगल में जानवर बढ़ेंगे तो खेती, ईंट भट्टा व्यवसाय आदि को बहुत नुकसान होगा।
जंगल से सटे गांवों के लोग अफवाहों से परेशान हैं। इसलिए, प्रशासन को गांव के हिसाब से साफ नक्शे, क्षेत्रफल और बफर जोन के परिणाम की जानकारी देनी चाहिए। पारंपरिक आजीविका की रक्षा के लिए लिखित गारंटी लेनी चाहिए। संबंधित ग्रापं से बातचीत करके आगे के फैसले लेने चाहिए।
– विजयकुमार सोनवने, उपसरपंच जांभली (दोडके)
