मोहाड़ी-तिरोड़ा रोड निर्माण पर उठे सवाल; घटिया सामग्री के इस्तेमाल और अवैध उत्खनन का आरोप
CM Gram Sadak Yojana: मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत निर्मित बोरगांव-तिरोड़ा रोड निर्माण के महज 15 दिनों के भीतर ही उखड़ने लगा है। ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाते हुए जांच की मांग की है।
Poor Quality Road (सोर्सः फाइल फोटो- सोशल मीडिया)
Mohadi Tiroda Road: मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत निर्मित बोरगांव, खड़की,पालोरा, जांभोरा, किसनपुर, करड़ी तिरोड़ा रोड के निर्माण कार्य पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मई माह में तैयार हुई यह सड़क मात्र 15 दिनों के भीतर कई स्थानों पर उखडने लगी है। विशेष रूप से पालोराजांभोरा मोड़ और अन्य हिस्सों में दरारें दिखाई देने से ग्रामीणों में सड़क की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ गई है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, बोरगांव से पालोरा तक पहले से खड़ीकरण वाला मार्ग मौजूद था। वहीं पालोराखड़की मार्ग से हाडगे के खेत तक लगभग 200 मीटर लंबी सीमेंट कांक्रीट सड़क का निर्माण वर्ष 202324 में जिला परिषद सार्वजनिक निर्माण विभाग की ओर से कराया गया था, जिसका भुगतान भी संबंधित ठेकेदारों को किया जा चुका है। इसके बावजूद उसी सड़क पर पुनः निर्माण दिखाकर बिल निकालने की प्रक्रिया शुरू होने का आरोप लगाया जा रहा है।
बनने के 15 दिन बाद ही उखड़ने लगी सड़क
जांभोरा फाटा से तिरोड़ा-करड़ी रोड फाटा तक निर्मित नई सीमेंट कांक्रीट सड़क का कार्य अत्यंत निम्न स्तर का है। आरोप है कि निर्माण में राख मिश्रित कांक्रीट का उपयोग किया गया, सड़क की मोटाई निर्धारित मानकों से कम रखी गई तथा निर्माण के बाद आवश्यक मात्रा में पानी का छिड़काव और क्योरिंग नहीं की गई। इसी कारण सड़क निर्माण के तुरंत बाद ही उसमें दरारें पड़ने लगीं।
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सड़क निर्माण के दौरान ही कांक्रीट बिछाने के कुछ समय बाद दरारें दिखाई देने लगी थीं। इस संबंध में स्थानीय समाचार पत्रों में पहले भी खबरें प्रकाशित की गई थीं, लेकिन संबंधित विभाग की ओर से कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
अवैध मुरूम उत्खनन का भी आरोप
ग्रामीणों ने सड़क निर्माण में उपयोग किए गए मुरूम को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि बोरगांव से तिरोड़ा-करड़ी फाटा मार्ग के किनारे डाला गया मुरूम अवैध उत्खनन से प्राप्त किया गया है। गोंदिया जिले के तिरोड़ा तहसील स्थित खेडेपार तथा मोहाड़ी तहसील के किसनपुर क्षेत्र में निजी खेतों से मुरूम निकालकर सड़क निर्माण में उपयोग किया गया।
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ग्रामीणों ने की निष्पक्ष जांच की मांग
किसनपुर, जांभोरा, केसलवाड़ा, खड़की, बोंडे, डोंगरदेव और ढिवरवाड़ा जैसे गांव नागझिराकोका अभयारण्य के बफर जोन क्षेत्र में आते हैं, जहां खनन और उत्खनन पर प्रतिबंध है। ऐसे में निजी खेतों से मुरूम उत्खनन कैसे हुआ और इसके लिए किसकी अनुमति ली गई, यह जांच का विषय है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि सड़क में आई दरारों, कथित अवैध मुरूम उत्खनन, पहले से बनी 200 मीटर सड़क पर दोबारा निर्माण के प्रयास, निम्न गुणवत्ता की निर्माण सामग्री तथा पर्याप्त क्योरिंग नहीं किए जाने जैसे सभी मुद्दों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही जांच पूरी होने तक संबंधित ठेकेदारों के भुगतान पर रोक लगाने की भी मांग की गई है।
