'शिवतीर्थ' पर राज ठाकरे से अचानक मिलने पहुंचे संजय राउत; विधान परिषद चुनाव के बीच मुलाकात से मची खलबली

Sanjay Raut Meets Raj Thackeray Shivtirth MLC Election 2026: विधान परिषद चुनाव के बीच अचानक 'शिवतीर्थ' पहुंचे संजय राउत, राज ठाकरे से की मुलाकात। कोंकण सीट पर लगाया 25 करोड़ का आरोप।
Sanjay Raut Meets Raj Thackeray
महायुति के भीतर मची बगावत के बीच संजय राउत पहुंचे राज ठाकरे के पास (फोटो क्रेडिट-X)
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Sanjay Raut Meets Raj Thackeray: महाराष्ट्र में स्थानीय निकायों के जरिए होने वाले विधान परिषद के चुनावी रण में महायुति और महाविकास अघाड़ी के बीच शह और मात का खेल जारी है। सीट आवंटन और नामांकन वापसी के बाद महायुति ने 17 में से 6 सीटों पर निर्विरोध जीत दर्ज कर बढ़त तो बना ली है, लेकिन जलगांव और नासिक जैसी सीटों पर महायुति के भीतर ही अपनों ने बगावत कर उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। दूसरी तरफ इस पूरे मुकाबले में महाविकास अघाड़ी का प्रदर्शन बेहद फीका नजर आ रहा है। इस नाजुक मोड़ पर संजय राउत का राज ठाकरे के घर जाना केवल शिष्टाचार मुलाकात नहीं माना जा सकता, क्योंकि राउत ने इस चुनाव को लेकर सरकार पर बेहद गंभीर आरोप मढ़े हैं।

संजय राउत ने सनसनीखेज दावा किया है कि कोंकण निर्वाचन क्षेत्र से महाविकास अघाड़ी के आधिकारिक उम्मीदवार बाल माने को कम समर्थन का डर दिखाकर नाम वापस लेने के लिए मजबूर किया गया था।

कोंकण सीट पर 25 करोड़ के लेनदेन का गंभीर आरोप

संजय राउत ने हॉर्स ट्रेडिंग के मुद्दे पर महायुति को घेरते हुए आरोप लगाया कि कोंकण सीट पर विपक्ष के उम्मीदवार को बैठाने के लिए कुल 25 करोड़ रुपये दिए गए थे। उन्होंने विस्तृत जानकारी देते हुए दावा किया कि इस सौदे की 15 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि बीकेसी (बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स) के एक नामी होटल में पहुंचाई गई थी। बाल माने के मैदान से हटने के कारण ही अजित पवार गुट के अनिकेत तटकरे की निर्विरोध जीत का रास्ता साफ हो सका था। राउत इस आर्थिक अनियमितता और लोकतंत्र की हत्या के मुद्दे पर राज ठाकरे को साथ लेने की कोशिश कर रहे हैं।

ठाकरे बंधुओं को एकजुट करने का पुराना इतिहास

संजय राउत को महाराष्ट्र की राजनीति में उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के बीच की सबसे मजबूत और भरोसेमंद कड़ी के रूप में देखा जाता है। इससे पहले मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनावों के दौरान भी मराठी वोटों के विभाजन को रोकने के उद्देश्य से राउत ने दोनों भाइयों को एक मंच पर लाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी। हालांकि उस समय दोनों की राजनीतिक इच्छा तो पूरी हो गई थी, लेकिन वे नगर निगम की सत्ता हासिल करने में पूरी तरह सफल नहीं हो सके थे। उस चुनाव में उद्धव गुट को 65 सीटों पर जीत मिली थी, जबकि राज ठाकरे की मनसे को केवल छह सीटों से ही संतोष करना पड़ा था।

चुनावी नतीजों के बाद आई दूरियों को पाटने का प्रयास?

महानगरपालिका चुनाव के शुरुआती दौर में ठाकरे बंधुओं को कई बार सार्वजनिक मंचों पर साथ देखा गया था और दोनों ने मिलकर कई विधानसभा क्षेत्रों का दौरा भी किया था। उस दौरान 'मातोश्री' और 'शिवतीर्थ' के पारिवारिक आयोजनों में भी दोनों नेताओं का आना-जाना काफी बढ़ गया था। परंतु चुनाव के अंतिम परिणाम आने के बाद दोनों दलों के बीच का यह तालमेल अचानक बिखर गया और दोनों में फिर से दूरियां बढ़ती हुई देखी गईं। वर्तमान में राज ठाकरे ने भी इस विधान परिषद चुनाव पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है। ऐसे में राउत की इस यात्रा को ठाकरे बंधुओं के मोर्चे पर छाई लंबी शांति को तोड़ने और आगामी विधानसभा चुनावों के लिए नए सिरे से मराठी कार्ड खेलने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

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