Gondia News: मानागढ़ नहर सफाई में देरी से बढ़ी परेशानी, बैक वाटर से सड़कें और बस्तियां प्रभावित
Managarh Reservoir: गोंदिया जिले के सालेकसा स्थित मानागढ़ जलाशय की नहर सफाई का कार्य समय पर पूरा नहीं होने से बैक वाटर और जलभराव की समस्या बढ़ गई है।
- Written By: आंचल लोखंडे
Waterlogging Issue (सोर्सः सोशल मीडिया)
Managarh Canal Cleaning: गोंदिया जिले के सालेकसा तहसील के मानागढ़ जलाशय की मुख्य नहर व उप-नहरों की करीब 13 वर्षों बाद शुरू हुई सफाई और गाद निकालने का कार्य समय पर पूरा नहीं होने से क्षेत्र के नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मानसून शुरू होने के बाद नहर की सफाई अधूरी रहने से बारिश का पानी नहर में सुचारु रूप से नहीं बह पा रहा है, जिसके कारण कई स्थानों पर बैक वाटर की स्थिति बन गई है।
स्थिति यह है कि नहर का पानी कई जगहों पर ऊपर से बहकर सड़क पर आ रहा है, जिससे लोगों को आवागमन में कठिनाई हो रही है। वहीं कई स्थानों पर नहर से रिसने वाला पानी रिहायशी बस्तियों में जमा हो गया है। स्थानीय नागरिकों को जलभराव से राहत पाने के लिए स्वयं वाटर पंप लगाकर पानी की निकासी करनी पड़ रही है। इसके अलावा नहर से निकाली गई गाद भी कई जगह रास्तों पर ही पड़ी हुई है, जिससे लोगों की आवाजाही प्रभावित हो रही है।
13 साल बाद शुरू हुई नहर सफाई समय पर पूरी नही
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि मानागढ़ नहर की सफाई और गाद निकालने की मांग को लेकर जनप्रतिनिधियों व सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा कई बार संबंधित विभाग को ज्ञापन दिए गए थे। इसके बाद शासन द्वारा कार्य के लिए निधि भी उपलब्ध कराई गई, लेकिन यदि सफाई अभियान समय रहते शुरू कर दिया जाता तो मानसून के दौरान नागरिकों को इस तरह की समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ता।
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किसानों और नागरिकों की मुश्किलें बढ़ीं
जानकारी के अनुसार, मानागढ़ जलाशय की मुख्य नहर की पिछले 13 वर्षों से सफाई नहीं हुई थी, जिसके कारण उसमें बड़ी मात्रा में गाद जमा हो गई थी। इससे सिंचाई व्यवस्था प्रभावित हो रही थी और जलाशय का पानी कई गांवों तक नहीं पहुंच पा रहा था।
मानागढ़ नहर सफाई अभियान धीमा
प्रशासन ने नहर सफाई कार्य को 30 जून 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया था, लेकिन तय समय सीमा के भीतर कार्य पूरा नहीं हो सका। वर्तमान में 16 उप-नहरों में से केवल 4 की ही सफाई पूरी हुई है, जबकि मुख्य नहर में लगभग 2 किमी तक ही गाद निकाली जा सकी है।
बैक वाटर से परेशान हुए ग्रामीण
मानागढ़ जलाशय से लगभग 1,525 हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई होती है। गाद जमा होने और वर्षों से रखरखाव नहीं होने के कारण गोर्रे, सितेपाला, हलबीटोला, मुरूमटोला, सालेकसा, आमगांव खुर्द, बोदलबोडी तथा दरबड़ा सहित कई गांवों तक पर्याप्त सिंचाई का पानी नहीं पहुंच पा रहा था। इसके चलते कुल सिंचित क्षेत्र का लगभग एक-तिहाई हिस्सा सिंचाई सुविधा से वंचित हो गया और वर्तमान में केवल 983 हेक्टेयर भूमि को ही सिंचाई का लाभ मिल पा रहा है।
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मानागढ़ जलाशय की सफाई में देरी
स्थानीय किसानों और नागरिकों का कहना है कि यदि यह अभियान एक माह पहले शुरू किया गया होता तो मानसून आने से पहले पूरा कार्य समाप्त हो जाता और न तो पानी की बर्बादी होती तथा न ही आज बैक वाटर, जलभराव और आवागमन की समस्या उत्पन्न होती।
1525 हेक्टेयर सिंचाई क्षेत्र पर असर
मानागढ़ जलाशय के अभियंता महेश बांडे ने बताया कि रेलवे क्रॉसिंग के पास तकनीकी कारणों से गाद निकालने और सफाई का कार्य पूरा नहीं हो सका। बारिश रुकते ही शेष सफाई अभियान तत्काल शुरू किया जाएगा, जिससे भविष्य में बैक वाटर की समस्या नहीं आएगी।
