ग्रामीण महिलाओं का खेती में बराबरी का हक, 7/12 पर दर्ज होगा नाम, महाराष्ट्र सरकार लागू की नई योजना
Maharashtra News: महाराष्ट्र सरकार ने ग्रामीण महिलाओं को खेती में अधिकार देने के लिए लक्ष्मी मुक्ति योजना शुरू की। अब पति की जमीन के 7/12 पर पत्नी का नाम सह मालिक के रूप में दर्ज होगा, वह भी निःशुल्क।
- Written By: आकाश मसने
कॉन्सेप्ट फोटो (सोर्स: सोशल मीडिया)
Maharashtra Laxmi Mukti Yojana: महिलाओं को आर्थिक दृष्टि से स्वावलंबी बनाने तथा उन्हें खेती में प्रत्यक्ष अधिकार प्रदान करने के उद्देश्य से महाराष्ट्र सरकार ने लक्ष्मी मुक्ति योजना शुरु की है। इस योजना के अंतर्गत अब पति की जमीन के 7/12 पर पत्नी का नाम भी सह मालिक के रुप में दर्ज किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि यह संपूर्ण प्रक्रिया पूरी तरह निःशुल्क रहेगी। शासन का दावा है कि इस योजना से ग्रामीण महिलाओं को न केवल खेती पर हक मिलेगा बल्कि वे परिवार के आर्थिक निर्णयों में भी सक्रिय भूमिका निभा सकेंगी।
ग्रामीण समाज में महिलाओं को अक्सर संपत्ति पर सीधा अधिकार नहीं मिलता। लक्ष्मी मुक्ति योजना का उद्देश्य इस असमानता को दूर करना है। जमीन पर महिला का नाम शामिल होने से उन्हें कानूनी व सामाजिक सुरक्षा मिलेगी। साथ ही वे कृषि कर्ज, सरकारी योजनाओं व बचत समूहों के माध्यम से वित्तीय सहायता प्राप्त कर सकेंगी।
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विशेषज्ञों का मानना है कि लक्ष्मी मुक्ति योजना ग्रामीण समाज में महिलाओं के आर्थिक व सामाजिक सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम साबित होगी। महिलाओं का नाम 7/12 पर दर्ज होने से उन्हें केवल संपत्ति पर अधिकार ही नहीं मिलेगा बल्कि परिवार के भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों में उनकी भागीदारी भी बढ़ेगी।
कागजात संलग्न करना अनिवार्य
इस योजना के लिए आवेदन करते समय कुछ कागजात संलग्न करना अनिवार्य किया गया है। जिनमें विवाह पंजीयन प्रमाण पत्र, 7/12 की अपडेट प्रति, आधार कार्ड अथवा मान्य पहचान पत्र जरूरी है। लाभार्थियों को आवेदन के लिए सीधे अपने गांव के पटवारी कार्यालय से संपर्क करना होगा।
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पटवारी के समक्ष पत्नी का नाम सह मालिक के रूप में दर्ज करने के लिए आवेदन जमा किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि यह प्रक्रिया सरल, पारदर्शी और तात्कालिक रुप से पूरी की जाएगी, जिससे किसान दंपत्ति को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो।
खुलेगा वित्तीय सहयोग का मार्ग
जिला प्रशासन का मानना है कि महिलाओं का नाम 7/12 पर दर्ज होने से उन्हें बचत गटों के माध्यम से कर्ज प्राप्त करने में आसानी होगी। अब तक महिलाएं सिर्फ पति के नाम पर आश्रित होकर आर्थिक मदद लेती थीं, लेकिन इस योजना से वे सीधे लाभ प्राप्त कर सकेंगी। कृषि व्यवसाय से जुड़ी आर्थिक सहायता भी महिलाओं तक आसानी से पहुंच पाएगी।
महिलाओं को लाभ पहुंचाना उद्देश्य
गोंदिया जिलाधीश प्रजीत नायर ने कहा कि किसान इस योजना का लाभ अवश्य लें और अपनी पत्नी को खेती में बराबरी का अधिकार दें। सरकार का उद्देश्य अधिक से अधिक महिलाओं तक योजना का लाभ पहुंचाना है। इसे सेवा पखवाड़ा अभियान अंतर्गत गोंदिया जिले में विशेष रूप से लागू किया जा रहा है।
