खरीफ बुआई शुरू: गोंदिया कृषि विभाग ने किसानों को नकली बीज से सावधान रहने की दी सलाह

Gondia Kharif Sowing: गोंदिया में खरीफ मौसम की धान बुआई शुरू हो गई है। कृषि विभाग ने किसानों से अधिकृत विक्रेताओं से ही बीज खरीदने, बिल लेने और नकली व मिलावटी बीज से सावधान रहने की अपील की है।
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Kharif Sowing (सोर्सः फाइल फोटो-सोशल मीडिया)
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Gondia Agriculture News: खरीफ मौसम की बुआई के लिए किसान बीज खरीदी करने के लिए दुकानों पर पहुंच रहे हैं। लेकिन बीज में मिलावट कर किसानों की जालसाजी होने की संभावना है। जिससे कृषि विभाग ने अधिकृत विक्रेता द्वारा बीज खरीदी करने की अपील की है। खरीफ मौसम की मशक्कत कर किसान बीज खरीदी के लिए भागदौड़ कर रहे हैं। लेकिन इस समय बीज में मिलावट कर किसानों को फंसाया जाता है। जिससे किसान बीज खरीदी करते समय सावधानी बरते, उसी तरह गुणवत्ता व दर्जे की गारंटी देने वाले अधिकृत विक्रेता द्वारा ही बीज खरीदी को प्राथमिकता दें, ऐसा आव्हान कृषि विभाग द्वारा किया जा रहा है।

किसानों ने जाली, मिलावटयुक्त बीज खरीदी टालने के लिए अधिकृत विकेता द्वारा बिल सहित खरीदी करें, बीज पर बीज का पूरा विवरण जिसमें फसल, वाण, लॉट नंबर, बीज के कंपनी का नाम, कीमत व खुद बील पर हस्ताक्षर, अंगुठा देकर विक्रेता के हस्ताक्षर होने संबंधी जांच कर ले।

बीज खरीदते समय बरतें सावधानी

खरीदी किए बीज वेष्टन, थैली, टैग, खरीदी का बिल व बीज फसल की कटाई होने तक बराबर रखे। जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी से संपर्क करें मिलावट का संदेह दूर करने के लिए बीज के पैकेट, बैग सीलबंद होने की खात्री करें।

बीज अंकुरित की खात्री के लिए पैकेट, बैग पर अंतिम तारीख देखे, कम वजन का निविष्ठा उसी तरह छपाई कीमत से ज्यादा कीमत से बिक्री व आदि शिकायत के लिए समीप के कृषि विभाग के कृषि अधिकारी, पंचायत समिति, तहसील कृषि अधिकारी, उपविभागीय कृषि अधिकारी, जिला गुणनियंत्रण निरीक्षक, अभियान अधिकारी, जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी से संपर्क करें, ऐसा आवाहन कृषि विभाग ने किया है।

ऐसे होती है जालसाजी

ठेलेवाले विक्रेता, घर पहुंच सेवा देनेवाले से बीज, खाद व दवाई की खरीदी न करें, उनके द्वारा जालसाजी होने की संभावना होती है। उनके पास का उत्पादन सरकार मान्य नहीं होता, इस उत्पादन के इस्तेमाल से उत्पादन में खरीदी की रसीद भविष्य में होने वाला नुकसान उपयोगी नहीं, इन विक्रेता को खेती संबंधी ज्ञान नहीं होता, सिर्फ बिक्री यही एकमात्र उद्देश होता है। स्थानीय न होने से फसल का नुकसान के बाद वे मिलते नहीं। कुछ समय उत्पादक कंपनी अस्तित्व में नहीं होती है।

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