कालीसराड़ के घने जंगल में तबाही का मंजर, तेज आंधी-तूफान से 2 हजार से अधिक पुराने पेड़ जमींदोज

Kalisaradh Forest Sstorm: गोंदिया के सालेकसा तहसील के बिजेपार क्षेत्र में 29 जुलाई की रात आए तेज आंधी-तूफान से कालीसराड़ के जंगल में भारी नुकसान हुआ।
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कालीसराड़ जंगल तूफान(सोर्सः सोशल मीडिया)
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Trees Fallen In Kalisaradh Forest: सालेकसा तहसील के बिजेपार क्षेत्र में 29 जुलाई की रात आए तेज आंधी-तूफान ने कालीसराड़ के घने जंगल में भारी तबाही मचाई थी दी। तेज हवाओं के चलते जंगल में 50 से 100 वर्ष पुराने दो हजार से अधिक विशाल पेड़ जड़ से उखड़कर जमीन पर गिर गए। बड़ी संख्या में पुराने और घने वृक्षों के धराशायी होने से वन संपदा को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा है।

बिजेपार गांव से कुछ ही दूरी पर घना जंगल शुरू होता है। इस क्षेत्र की पहचान दशकों पुराने विशाल और घने पेड़ों के कारण रही है। 30 जुलाई को जंगल क्षेत्र में पहुंचे स्थानीय नागरिकों को बड़ी संख्या में पेड़ जड़ समेत गिरे हुए दिखाई दिए। जंगल में इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों के गिरने का दृश्य देखकर नागरिक भी हैरान रह गए। इसके बाद स्थानीय लोगों ने तत्काल इसकी जानकारी वन विभाग को दी।

50 से 100 साल पुराने पेड़ गिरे

जानकारी मिलने के बाद वन विभाग के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। प्रारंभिक तौर पर सामने आया कि 29 जुलाई की रात कालीसराड़ बांध परिसर और आसपास के जंगल क्षेत्र में अचानक तेज आंधी चली। देखते ही देखते हवा की गति काफी बढ़ गई और तूफान ने विकराल रूप धारण कर लिया। बताया जाता है कि घने जंगल में तेज हवाओं के कारण हवा का दबाव बड़े-बड़े वृक्षों पर पड़ा। कई पुराने और विशाल वृक्ष इस तेज दबाव को सहन नहीं कर सके और जड़ों समेत जमीन पर गिर गए। अनेक स्थानों पर पेड़ों के तने और शाखाएं टूटकर बिखरी हुई दिखाई दीं। तूफान का प्रभाव इतना अधिक था कि बड़ी संख्या में पुराने वृक्ष एक साथ धराशायी हो गए।

पहली बार इतनी बड़ी संख्या में पेड़ गिरने से आश्चर्य

स्थानीय नागरिकों के अनुसार कालीसराड़ जंगल क्षेत्र में इससे पहले इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों के एक साथ गिरने की घटना देखने को नहीं मिली थी। 50 से 100 वर्ष पुराने पेड़ों के गिरने से वन संपदा को भारी नुकसान हुआ है। इन पेड़ों के पुनर्निर्माण में दशकों का समय लग सकता है, इसलिए इस प्राकृतिक आपदा को वन क्षेत्र के लिए बड़ा नुकसान माना जा रहा है। वन विभाग द्वारा गिरे हुए पेड़ों का पंचनामा और नुकसान का आकलन किए जाने की आवश्यकता है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि कुल कितने पेड़ गिरे हैं और उनमें कितने पेड़ पुराने तथा कितने मूल्यवान प्रजातियों के हैं।

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वन संपदा के नुकसान का किया जाए आकलन

स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि वन विभाग द्वारा कालीसराड़ जंगल का विस्तृत सर्वेक्षण कराया जाए। गिरे हुए पेड़ों की संख्या, उनकी आयु, प्रजाति तथा अनुमानित वन संपदा के नुकसान का वैज्ञानिक तरीके से आकलन किया जाए। इसके अलावा गिरे हुए पेड़ों को लेकर आगे की कार्रवाई भी नियमानुसार की जाए, ताकि प्राकृतिक आपदा के कारण हुए नुकसान के बाद किसी प्रकार की अनियमितता की गुंजाइश न रहे।

कालीसराड़ जंगल को भारी नुकसान

पूर्व पंचायत समिति उपसभापति दिलीप वाघमारे ने कहा कि कालीसराड़ बांध परिसर में आए तेज आंधी-तूफान के कारण हजारों की संख्या में बड़े-बड़े पेड़ गिर गए हैं। इससे पहले इस क्षेत्र में इतनी बड़ी घटना कभी देखने को नहीं मिली थी। इतनी बड़ी संख्या में पुराने पेड़ों के धराशायी होने से वन संपदा का भारी नुकसान हुआ है।

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