Kachargarh festival (सोर्सः सोशल मीडिया)
Gondia Tribal Festival: आदिवासी समुदाय के प्रमुख श्रद्धास्थान कचारगढ़ में मंगलवार को पांच दिवसीय तीर्थयात्रा एवं कोया पुनेम महोत्सव शांतिपूर्ण और उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। देशभर से आए गोंड एवं अन्य आदिवासी समुदायों के श्रद्धालुओं ने इस यात्रा में भाग लेकर अपने आराध्य देवी-देवताओं के दर्शन किए और पूर्वजों को नमन किया। तीर्थयात्रा के दौरान गोंडी धार्मिक परंपराएं, बोली, रीति-रिवाज, नृत्य, कला और संस्कृति की भव्य झलक देखने को मिली।
मंगलवार को पूर्वजों को अभिवादन करने के बाद श्रद्धालु अपने-अपने स्थानों की ओर वापसी यात्रा पर रवाना हो गए।इस वर्ष देश के 18 राज्यों से पांच लाख से अधिक गोंडी श्रद्धालु कचारगढ़ पहुंचे। इनमें महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, तेलंगाना, बिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश से बड़ी संख्या में भक्त शामिल थे। इसके अलावा दिल्ली, उत्तराखंड, असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, कर्नाटक, नागालैंड और गुजरात से भी श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही।
आदिवासी एवं गोंडी समुदाय के लोग प्रतिवर्ष कचारगढ़ में आयोजित कोया पुनेम महोत्सव में भाग लेते हैं। पांच दिनों तक चले इस राष्ट्रीय स्तर के आयोजन में शासन-प्रशासन का सक्रिय सहयोग रहा। छोटे-बड़े व्यापारियों और विभिन्न व्यवसायों को रोजगार के अवसर प्राप्त हुए।
कचारगढ़ देवस्थान ट्रस्ट और आदिवासी समुदाय के करीब एक हजार स्वयंसेवकों ने निस्वार्थ सेवा प्रदान की। राष्ट्रीय गोंडवाना परिषद के इस पांच दिवसीय आयोजन का समापन सड़क अर्जुनी नगराध्यक्ष तेजराम मडावी की उपस्थिति में तथा कचारगढ़ पेंनठाना अध्यक्ष दुर्गा प्रसाद कोकोटे की अध्यक्षता में संपन्न हुआ।
पांच दिवसीय महोत्सव के दौरान गोंडी साहित्य, कला, पुस्तकें, पारंपरिक वस्त्र और आयुर्वेदिक औषधीय पौधों के स्टॉल लगाए गए थे, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिले। महोत्सव के सफल आयोजन के लिए पारी कुपार लिंगो काली कंकाली पेंनठाना कचारगढ़ समिति के अध्यक्ष दुर्गाप्रसाद कोकोड़े, उपाध्यक्ष शकुंतला परते, सचिव राधेश्याम टेकाम, सहसचिव नरेश सयाम, कोषाध्यक्ष परमेश्वर उईके तथा सदस्य भोजराज मसराम और अनिल वट्टी ने विशेष प्रयास किए।
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कचारगढ़ यात्रा में लाखों श्रद्धालुओं की उपस्थिति को देखते हुए प्रशासन द्वारा कड़ा पुलिस बंदोबस्त तैनात किया गया था। सालेकसा के पुलिस निरीक्षक भूषण बुराडे ने कहा कि “किसी भी अनहोनी को रोकने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई थी।”सालेकसा के तहसीलदार नरसय्या कोंडागुर्ले ने कहा कि “जिला प्रशासन के निर्देशों और समिति के साथ समन्वय के चलते कचारगढ़ यात्रा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई।”