

Gondia Administrators Financial Power Crisis: गोंदिया जिले की 188 ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद नई चुनाव प्रक्रिया पूरी नहीं होने से पिछले कई महीनों से इन पंचायतों का संचालन प्रशासकों के भरोसे है। इन स्थानों पर मौजूदा सरपंचों को ही प्रशासक नियुक्त किया गया है। हालांकि, प्रशासकों को पूर्ण आर्थिक अधिकार प्राप्त नहीं होने से ग्राम पंचायतों का रोजमर्रा का कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
विकास कार्यों, अत्यावश्यक सेवाओं और ठेकेदारों के भुगतान महीनों से अटके होने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में नाराजगी बढ़ रही है। कई स्थानों पर नियुक्त प्रशासकों ने अधिकारों के अभाव और नागरिकों के बढ़ते दबाव के चलते इस्तीफे देना शुरू कर दिया है। लेकिन इन इस्तीफों को स्वीकार करने और मंजूर करने का अधिकार किसके पास है, इसे लेकर प्रशासनिक स्तर पर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। इससे पूरा मामला और पेचीदा हो गया है।
ग्राम पंचायत चुनावों में आरक्षण निर्धारण, प्रभाग रचना और विशेष रूप से ओबीसी आरक्षण से जुड़ी कानूनी व प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण देरी हुई है। राज्य निर्वाचन आयोग ने वर्ष 2026 में आरक्षण व चुनाव प्रक्रिया को लेकर नए आदेश और कार्यक्रम जारी किए हैं, लेकिन जिले की कई ग्राम पंचायतों के चुनाव अभी भी लंबित हैं।
ग्राम पंचायतों में मंजूर किए गए कई विकास कार्यों के बिल व भुगतान तैयार होने के बावजूद उनका भुगतान नहीं हो पा रहा है। इसका सीधा असर सड़कों, नालियों, पेयजल व्यवस्था, स्वच्छता, छोटी-बड़ी मरम्मत, बिजली बिल और रखरखाव जैसे कार्यों पर पड़ रहा है। शासन स्तर से निर्देश नहीं होने के कारण जिला परिषद व पंचायत समिति के वरिष्ठ अधिकारी भी इस मामले में निर्णय लेने से असमर्थ दिखाई दे रहे हैं। इस्तीफा देने वाले पदाधिकारियों की स्थिति 'न उगलते बने, न निगलते' जैसी हो गई है।
सौंदड़ ग्राम पंचायत के सरपंच व सरपंच संगठन सड़क अर्जुनी के तहसील अध्यक्ष हर्ष मोदी ने शासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतें ग्रामीण विकास की रीढ़ हैं। चुनाव लंबित रहने और प्रशासकों के पास आर्थिक अधिकार नहीं होने से गांवों का विकास पूरी तरह प्रभावित हुआ है।
उन्होंने मांग की कि सरकार प्रशासकों को आवश्यक आर्थिक अधिकार प्रदान करे अथवा ग्राम पंचायत चुनाव की प्रक्रिया जल्द पूरी कर लोकतांत्रिक तरीके से निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को फिर से ग्राम पंचायतों का कारभार सौंपे। ग्रामीण जनता को इस तरह और परेशान नहीं किया जाना चाहिए।
ग्राम पंचायतें ग्रामीण विकास की रीढ़ है। चुनाव लंबित रहने और प्रशासकों के पास आर्थिक अधिकार नहीं होने से गांवों का विकास पूरी तरह ठप हो गया है। बारिश के मौसम में नालियों की सफाई, स्ट्रीट लाइट, स्वच्छता, जलापूर्ति और छोटी-बड़ी मरम्मत जैसे जरूरी काम भी प्रभावित है।
विकास कार्यों के भुगतान अटकने से ठेकेदार भी परेशान हैं। शासन को गंभीरता से ध्यान देकर तत्काल समाधान करना चाहिए। प्रशासकों को आवश्यक आर्थिक अधिकार दिए जाएं अथवा ग्राम पंचायत चुनाव जल्द कराए जाए।
- सड़क अर्जुनी, सरपंच सगठन, तहसील अध्यक्ष, हर्ष मोदी