Gondia Wildlife Attack News: गोंदिया जिला प्रकृति की खान है। इसमें अर्जुनी मोरगांव तहसील घने जंगलों से ढका है। यहां के जंगल विभिन्न तरह के पेड़ों सहित दवा वाले पौधे हैं। इन सभी पेड़ों में महुआ फूल के पेड़ ज्यादा होने की वजह से महुआ फूल चुनने से हजारों लोगों को रोजगार मिल रहा है।
लेकिन महुआ फूल चुनने वालों पर अक्सर वन्यजीवों के हमले की घटना सामने आ रही है। जिसमें उनकी जान भी जा चुकी है। इसी बीच वर्ष 2025 से मार्च 2026 के दौरान करीब 70 से ज्यादा लोगों पर वन्यजीवों ने हमला किया है। जिसमें 4 लोगों की मौत भी हो चुकी है। पिछले वर्ष दिसंबर महीने में एक तेंदुए ने तीन लोगों को मौत के घाट उतार दिया था।
इस वर्ष जनवरी में पंद्रह दिनों के अंदर एक बाघ और एक तेंदुए ने एक महिला और एक बच्चे पर हमला कर उन्हें मौत के घाट उतार दिया। दो आदमखोर तेंदुओं को पकड़ने के बाद ग्रामवासियों ने राहत की सांस ली थी। सड़क अर्जुनी तहसील में एक बाघ ने एक महिला पर हमला कर दिया। जिसमें उसकी मृत्यु हो गई। जिससे ग्रामवासी फिर से डर के साए में जी रहे हैं।
इसी बीच, सड़क अर्जुनी तहसील के देवपायली की एक महिला तेंदुए के हमले में घायल हो गई। यह घटना 12 फरवरी की है। ग्रामीणों की सतर्कता से महिला येनुबाई गोबाडे की जान बच गई। लेकिन, गांव में डर का माहौल फैल गया है। इसी महीने, सड़क अर्जुनी तहसील के माहुर्ली में एक खेत में अरहर की फलियां तोड़ रही एक वृद्ध महिला पर बाघ ने हमला कर उसे मौके पर ही मौत के घाट उतार दिया।
पंद्रह दिन पहले, खेत में काम कर रहे एक युवक पर हमला कर उसे घायल कर दिया था। पंद्रह दिन के अंतर पर हुई इस घटना ने माहुर्ली, सौंदड़, कोसमतोंडी और आसपास के ग्रामवासियों में डर का माहौल है। वन विभाग की जानकारी के अनुसार, 2025 से मार्च 2026 तक जंगली जानवरों के हमलों में 4 लोगों की मौत हो गई तो करीब 70 लोग घायल हो गए।
गोंदिया जिले (Gondia) सहित अर्जुनी मोरगांव तहसील में महुआ फूल सबसे ज्यादा होता है। लेकिन उसके लिए जिले में कोई उद्योग प्रक्रिया नहीं है। अगर धान व महुआ फूल पर उद्योग प्रक्रिया स्थापित किया जाता है तो कई लोगों को रोजगार मिल सकता है।
गर्मियों में कोई काम नहीं होता। महुआ फूल चुनने से अच्छाखासा रोजगार मिलता है। लेकिन, महुआ फूल बेचने के लिए कोई खरीदी केंद्र नहीं है। इसलिए निजी व्यापारियों को महुआ फूल बेचना पड़ता है। इससे बहुत कम कीमत मिलती है। इसके लिए उम्मीद है कि धान खरीदी की तरह समर्थन मूल्य केंद्र शुरू किया जाए। (गोविंद राऊत, जांभुलपानी, सड़क अर्जुनी)
गोरेगांव तहसील में सिर्फ धान का उत्पादन लिया जाता है। इसके बाद हम गर्मियों में महुआ फूल चुनने का काम करते हैं। लेकिन, इसमें हमेशा वन्यजीवों का डर बना रहता है। वन्यजीवों का बंदोब्स्त वन विभाग ने करना चाहिए। अक्सर वन विभाग रुकावटें डालता है। इस वजह से महुआ फूल चुनने में मुश्किलें आती हैं। हमें उम्मीद है कि हमारा रोजगार नहीं छिनेगा।