बाघ और तेंदुए की दहशत (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Sadak Arjuni Tiger Terror: गोंदिया जिला जंगलों से व्याप्त है। तीन तहसील नवेगांव-नागझिरा टाइगर रिजर्व की सीमा से लगे हैं, इसलिए इस इलाके में हमेशा जंगली जानवरों का आना-जाना लगा रहता है। लेकिन, पहले यह आना-जाना खेतों के किनारे तक ही सीमित रहता था। लेकिन, अब जंगली जानवर गांव की तरफ भाग रहे हैं।
पिछले साल दिसंबर में एक तेंदुए ने तीन लोगों को मार डाला था। इस साल जनवरी में एक बाघ और एक तेंदुए ने दो सप्ताह में एक महिला और एक बच्चे को मार डाला था। दो आदमखोर तेंदुओं को पकड़ने के बाद गांववालों ने राहत की सांस ली थी। हालांकि, अब सड़क अर्जुनी तहसील में एक बाघ ने एक महिला को मारकर आतंक मचा दिया है।
इससे गांव वाले फिर से डर के साये में जी रहे हैं। इसी बीच, सड़क अर्जुनी तहसील के देवपायली की एक महिला तेंदुए के हमले में घायल हो गई। यह घटना 12 फरवरी को हुई थी। गांववालों की सतर्कता से महिला येनुबाई गोबाडे की जान बच गई। हालांकि, गांव में डर का माहौल फैल गया है।
सड़क अर्जुनी तहसील के माहुली में एक खेत में तुअर की फली तोड़ रही एक वृद्ध महिला पर बाघ ने हमला कर दिया और उसे वहीं मार डाला। पंद्रह दिन पहले खेत में काम कर रहे एक युवक पर बाघ ने हमला करके उसे घायल कर दिया था। पंद्रह दिन के अंतर पर हुई इस घटना से माहुली, सौंदड़, कोसमतोंड़ी और आस-पास के गांवों के लोगों में दहशत व्याप्त है। मौके पर बाघ के पैरों के निशान मिलने और वन विभाग की पुष्टि के बाद यह साफ हो गया कि इलाके में बाघ मौजूद है। इसके बाद वन विभाग ने गांववालों को अलर्ट रहने की चेतावनी दी।
ग्रामीणों को मजदूरी के लिए खेती के काम पर जाना पड़ता है। किसान सुबह से ही खेतों में काम कर रहे हैं। अगर बाघों के डर से खेती का काम बंद हो गया, तो सीजन तो जाएगा ही, फिर उनके सामने पूरे साल की रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा।
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इसलिए किसान और खेतिहर मजदूर जान हथेली पर रखकर खेतों में काम करते हैं। गुरुवार को देवपायली की एक महिला तेंदुए के हमले से बच निकली। वह गंभीर रूप से घायल हो गई है। इस घटना से गांव वाले रोष में आ गए और बाघ को काबू करने की मांग करने लगे।
सरकार बाघ और तेंदुए के हमलों में मारे गए लोगों के परिवारों को 25 लाख रुपये की पैसे की मदद दे रही है। हालांकि मदद की रकम काफी है, लेकिन इस पर विचार करके कोई पक्का हल निकालना जरूरी है कि क्या इससे किसी के परिवार की जान की भरपाई होगी, और क्या सिर्फ़ पैसे की मदद से परिवार के नुकसान की भरपाई हो जाएगी। इंसान-जंगली जानवरों के बढ़ते हमलों, खेती की फसलों को नुकसान और गांव के इलाके में बढ़ती आवाजाही की वजह से मानव-वन्यजीव का संघर्ष बढ़ रहा है। इसे रोकने के लिए असरदार कदम उठाने की जरूरत है।