शालाबाह्य और प्रवासी बच्चों की तलाश के लिए गोंदिया जिले में 15 से 30 जुलाई तक विशेष सर्वेक्षण अभियान
RTE 2009 campaign: RTE 2009 के तहत गोंदिया जिले में 15 से 30 जुलाई 2026 तक विशेष खोज अभियान चलाया जाएगा। शालाबाह्य, अनियमित और प्रवासी बच्चों का घर-घर सर्वेक्षण किया।
- Written By: आंचल लोखंडे
गोंदिया विशेष खोज अभियान- फाइल फोटो (सोर्सः सोशल मीडिया)
Gondia Special Search Campaign: बालकों का निःशुल्क व अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) 2009 के अनुसार 6 से 14 वर्ष आयु वर्ग के प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का कानूनी अधिकार है। इसलिए शालाबाह्य, अनियमित व प्रवासी बच्चों के सर्वेक्षण के दौरान एक भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे, इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए, ऐसे निर्देश जिलाधीश मंदार पत्की ने जिलाधीश कार्यालय में ‘विशेष खोज अभियान’ अंतर्गत जिला स्तरीय समिति की बैठक में दिए।
बैठक में प्रभारी जिप सीईओ प्रमिला जाखलेकर, शिक्षाधिकारी (प्राथमिक) पवन खंदारे, जिला शिक्षा व प्रशिक्षण संस्था के प्राचार्य राजकुमार हिवारे, उपशिक्षाधिकारी (माध्यमिक) गजानन मंदाडे सहित विभिन्न विभागों के प्रमुख अधिकारी उपस्थित थे।
गोंदिया में घर-घर होगा बच्चों का सर्वेक्षण
बैठक में बताया गया कि बालकों के निःशुल्क व अनिवार्य शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 के प्रभावी क्रियान्वयन तथा जिले के 3 से 18 वर्ष आयु वर्ग के शालाबाह्य, अनियमित व प्रवासी बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा में लाने के लिए शिक्षा संचालक (प्राथमिक), महाराष्ट्र राज्य, पुणे के निर्देशानुसार 15 जुलाई से 30 जुलाई 2026 तक पूरे गोंदिया जिले में व्यापक स्तर पर ‘विशेष खोज अभियान’ चलाया जा रहा है।
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RTE के तहत हर बच्चे को मिलेगा शिक्षा का अधिकार
इस महत्वपूर्ण शैक्षणिक अभियान में राजस्व, ग्राम विकास, नगर विकास, सामाजिक न्याय व विशेष सहायता, महिला व बाल विकास, कामगार विभाग, आदिवासी विकास, अल्पसंख्यक विकास, सार्वजनिक स्वास्थ्य व गृह विभाग के अधिकारियों की सहभागिता रहेगी। शासन ने इन विभागों के समन्वय से सर्वेक्षण को मंजूरी दी है। साथ ही दिव्यांग बच्चों के सर्वेक्षण के लिए विशेष शिक्षकों को भी जिम्मेदारी दी गई है। उन्होंने कहा कि जो बच्चे लगातार अनुपस्थित रहते हैं, उनके स्कूल से दूर रहने के कारणों की जांच की जाए।
अनियमित और प्रवासी बच्चों की होगी पहचान
कहीं बाल विवाह जैसी स्थिति तो नहीं है, इसकी भी पड़ताल की जाए। पर्यवेक्षण व्यवस्था को मजबूत करते हुए अधिक से अधिक क्षेत्रीय दौरे किए जाएं। जिन स्थानों पर शालाबाह्य व प्रवासी बच्चों के मिलने की संभावना अधिक है, वहां विशेष ध्यान देकर सर्वेक्षण किया जाए।शिक्षाधिकारी पवन खंदारे ने अभियान के तहत अब तक की गई कार्रवाई और आगामी योजना की जानकारी प्रस्तुत की।
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घर-घर जाकर होगा सर्वेक्षण
इस अभियान के तहत जिले के सभी गांवों, बस्तियों, टोलों, खेतों और जंगल क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों के घर-घर जाकर प्रगणकों द्वारा सर्वेक्षण किया जाएगा। शालाबाह्य बच्चों की खोज के लिए केवल पारंपरिक पद्धति का उपयोग न करते हुए ढोल-ताशों के साथ जनजागरण रैली, दिंडी और विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। स्थानीय जनप्रतिनिधियों व अभिभावकों की सहभागिता से बच्चों को उनकी आयु के अनुसार कक्षा में प्रवेश दिलाया जाएगा।
