गोंदिया में बढ़े छोटे विवाद, एक साल में 6,278 अदखल पात्र मामले दर्ज
Non Cognizable Cases: गोंदिया में सहनशीलता घटने से 1 साल में 6,278 अदखल पात्र मामले दर्ज। पुलिस समुपदेशन केंद्रों के जरिए आपसी सुलह से विवाद सुलझाने का प्रयास कर रही है।
- Written By: केतकी मोडक
अदखल पात्र प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स - सोशल मिडिया)
Gondia Rise In Non Cognizable Cases: समाज में घटती सहनशीलता की तस्वीर सामने आ रही है और छोटी-छोटी वजहों से भी सीधे पुलिस थाने जाने वाले नागरिकों की संख्या बढ़ गई है। सड़क पर चलते समय धक्का लगने या पालतू जानवर गंदगी करने पर भी सीधे पुलिस से संपर्क किया जाता है। इसके चलते पिछले वर्ष जिले में अदखल पात्र अपराधों की संख्या 6,278 तक पहुंच गई है। बदलती जीवनशैली में लोग अपना धैर्य खोते जा रहे हैं, छोटी-छोटी वजहों से भी अपराध दर्ज हो रहे हैं।
कार पार्किंग पर बहस, खेत के मेड़ या पानी की लाइन को लेकर छोटे-मोटे झगड़े, सड़क पर चलते समय धक्का लगने से होने वाले गाली-गलौज, मोबाइल या सोशल मीडिया पर की गई छोटी-मोटी टिप्पणियां सीधे पुलिस थाने तक पहुंच जाती है। ऐसे छोटे-मोटे विवादों के चलते पुलिस पर काम का बोझ बढ़ता जा रहा है और पुलिस इन विवादों को बातचीत और समझौते से सुलझाने की कोशिश कर रही है।
विवाद को समझौते से सुलझाने का प्रयास
अगर हर छोटा-मोटा विवाद न्यायालय में चला जाएगा तो न्यायालय और गोंदिया पुलिस पर दबाव बहुत बढ़ जाएगा। इससे बचने के लिए पुलिस समझौता और समुपदेशन पर जोर देती है। पुलिस द्वारा थाने में समुपदेशन केंद्र के माध्यम से दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठाकर मौके पर ही विवाद सुलझाने और उनकी गलतफहमियों को दूर करने का सफल प्रयास किया जाता है। इससे पुलिस पर काम का बोझ कम हो जाता है। इससे आगे के विवादों को कम करने में भी मदद मिलती है।
सम्बंधित ख़बरें
असली या नकली? पनीर को लेकर नासिक में बढ़ा भ्रम, मेन्यू से हटाए लोकप्रिय व्यंजन; प्रशासन पर उठे सवाल
नसरापुर दुष्कर्म-हत्या मामला अंतिम चरण में, एक महीने के भीतर आ सकता है फैसला
कर्जमाफी पर शरद गुट का सरकार पर दबाव, शशिकांत शिंदे बोले- शर्तें हटाकर दें 2 लाख तक की राहत
कर्जमाफी योजना के विरोध में वर्धा में किसान आंदोलन, शासन निर्णय की जलाई जाएगी प्रतीकात्मक होली
यह भी पढ़ें:- पुणे में सजेगा100वां अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन, 2027 में 28 से 31 जनवरी तक होगा आयोजन
समझाइश कर विवाद को सुलझाने का करते हैं प्रयास
गोंदिया अपराध शाखा पुलिस निरीक्षक पुरुषोत्तम अहेरकर ने कहा है कि “छोटे-छोटे विवादों को लेकर न्यायालय में मुकदमा दायर करने से नागरिकों का समय और धन दोनों बर्बाद होता है। विवादों को अक्सर सुलह से सुलझाया जा सकता है। थाने पर आने वाली छोटी-मोटी शिकायतों में पुलिस अधिकारी पहले समझाइश कर विवाद को सुलझाने का प्रयास करते है।”
थाने में शिकायत आने के बाद मामलों का समाधान ऐस
थाने में शिकायत आने के बाद सबसे पहले उसे गंभीरता से दर्ज किया जाता है। दोनों पक्षों को थाने बुलाकर समझाइश दी जाती है। शिकायतकर्ता को न्यायालय में जाकर निजी आपराधिक मामला दायर करने की अनुमति है। अगर न्यायालय का आदेश मिल जाए तो पुलिस आरोपी के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल कर सकती है।
