Gondia: 2 दिन, 4 नगर, शुरू चुनावी घमासान, ‘अकेले लड़ेंगे’ के नारे से बिगड़ी राजनीतिक बिसात!
Gondia Municipal Elections: गोंदिया, तिरोड़ा, गोरेगांव और सालेकसा में नगर निकाय चुनाव चरम पर। ‘अकेले लड़ेंगे’ के नारे से राजनीतिक समीकरण बिगड़े, टिकट और नामांकन को लेकर हलचल तेज।
- Written By: प्रिया जैस
गोंदिया न्यूज
Maharashtra Local Body Polls: गोंदिया जिले में नप और नपं के आम चुनावों के लिए सभी राजनीतिक दलों ने काम करना शुरू कर दिया है। हालांकि, नामांकन दाखिल करने के लिए केवल दो दिन शेष हैं और रविवार के छुट्टी भी नामांकन प्रक्रिया शुरू रहेगी। वहीं सोमवार को नामांकन दाखिल करने का अंतिम दिन है। जिले में गोंदिया और तिरोड़ा नप व गोरेगांव और सालेकसा नपं के लिए चुनाव हो रहे हैं।
जिले में होने वाले चार नगरीय निकायों में चुनाव की सरगर्मी है। जब राज्य और केंद्र स्तर के चुनावों की बात आती है, तो नेता एक साथ आते हैं और एक मंच पर दिखाई देते हैं। हालांकि, कार्यकर्ताओं के चुनाव में वे एक-दूसरे के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं। उसमें भी, नेता यह कहकर कार्यकर्ताओं में जोश भरने की पूरी कोशिश कर रहे हैं कि चुनाव कार्यकर्ताओं के लिए है और अपने दम पर चुनाव लड़ने का नारा दे रहे हैं।
नेताओं के लिए प्रतिष्ठा का सवाल
अभी तक दोनों आघाड़ी एक साथ नहीं आए हैं, ऐसी स्थिति बन गई है। इसलिए, चारों जगहों पर सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने ‘अकेले लड़ने’ की भूमिका अपनाते हुए तैयारियां शुरू कर दी है। यह चुनाव भले ही कार्यकर्ताओं का हो, जिले के वर्तमान व पूर्व विधायकों व सांसदों के लिए यह प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है।
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चारों स्थानीय नगर निकायों की बात करें तो अभी तक किसी भी दल ने यह स्पष्ट नहीं किया है। इस पद के कुछ दावेदारों को वह दल अपना उम्मीदवार नहीं बनाएगा जिससे उन्होंने उम्मीदवारी मांगी थी। इस बात पर भी चर्चा शुरू हो गई है।
ऑनलाइन-ऑफलाइन से असमंजस
राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनावों के लिए ऑनलाइन आवेदन जमा करने की अपील की थी। साथ ही निर्देश दिया था कि ऑफलाइन प्रतियां भी चुनाव आयोग में जमा की जाएं। ऑनलाइन आवेदन करते समय पूरे दस्तावेज डाउनलोड करके जमा करने के निर्देश थे, लेकिन 12 नवंबर को चुनाव आयोग ने इसमें बदलाव करते हुए निर्देश दिया कि केवल नामांकन पत्र पर दी गई जानकारी अपलोड करके ही नामांकन जमा किया जाए। लेकिन ऑनलाइन आवेदन के बाद भी ऑफलाइन फॉर्म भरना अनिवार्य है और इसे लेकर कई उम्मीदवार असमंजस में हैं।
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AB फॉर्म मिलने के बाद ही उम्मीदवारी पक्की
जिन लोगों को टिकट नहीं मिला, उन्होंने दूसरे दलों से संभावनाएं तलाशने या स्वतंत्र गठबंधन बनाने का ‘बी प्लान’ बना लिया है। कुछ आर्थिक रूप से सक्षम उम्मीदवारों ने स्थानीय स्तर पर धन और निर्वाचन क्षेत्र में प्रभाव के आधार पर अपनी लॉबी भी बना ली है।
उम्मीदवारी के दावों की राजनीति भले ही गरमा गई हो, लेकिन यह भी उतना ही स्पष्ट है कि आधिकारिक एबी फॉर्म मिलने तक किसी की भी उम्मीदवारी पक्की नहीं होगी। अगले कुछ दिनों में राजनीतिक परिदृश्य में जो समीकरण बनेंगे, वे दिलचस्प होंगे।
