नेताओं और पार्टियों के सामने चुनाव की चुनौती, टिकट कटने से बढ़ा असंतोष, मतदान पर प्रभाव की आशंका
Ticket denial Controversy: गोंदिया नगर परिषद चुनाव में टिकट कटने से कई दलों में असंतोष बढ़ा। नाराज़ कार्यकर्ताओं के बागावती रुख से मतदान और चुनाव परिणामों पर असर की आशंका है।
- Written By: आंचल लोखंडे
नेताओं और पार्टियों के सामने चुनाव की चुनौती (सौजन्यः सोशल मीडिया)
Gondia municipal election: गोंदिया नगर पालिका और नगर पंचायत चुनाव के लिए सोमवार को नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि थी। इससे पहले कई दावेदारों ने अपने-अपने राजनीतिक दलों से टिकट की मांग की थी और उन्हें आश्वासन भी दिए गए थे। लेकिन अंतिम समय में अनेक कारणों का हवाला देकर कई नेताओं के टिकट काट दिए गए, जिससे व्यापक असंतोष फैल गया।
टिकट न मिलने से नाराज़ उम्मीदवार तुरंत ही अन्य पार्टियों में शामिल होने लगे, जबकि कुछ ने पार्टी में रहकर ही असहयोग या अंदरूनी विरोध की राह पकड़ ली है। इससे मतदान पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना बढ़ गई है। नामांकन की प्रक्रिया समाप्त होते ही मंगलवार से चुनाव प्रचार में तेजी आ गई है। अब सभी दल और उम्मीदवार जोर-शोर से मैदान में उतर चुके हैं।
तीन साल की तैयारी, बढ़ी निराशा
पिछले तीन वर्षों से कई उम्मीदवार चुनाव की तैयारी में जुटे थे। प्रशासनिक प्रतिबंधों के बीच भी उन्होंने अपने वार्डों में निजी खर्च से विकास कार्य कराए। चाहे सरकारी काम हो या सामाजिक। 17 नवंबर को पार्षद और नगराध्यक्ष पदों के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि थी। दलों ने टिकट सूची को अत्यंत गोपनीय रखा और रविवार शाम को उम्मीदवारों की घोषणा की।
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निराशा और नाराज़गी चरम पर
जिन कार्यकर्ताओं ने वर्षों से पार्टी और वार्ड में सक्रियता दिखाई थी, उनके टिकट कटने से निराशा और नाराज़गी चरम पर पहुंच गई। कुछ ने तुरंत दूसरी पार्टी का दामन थामा और टिकट हासिल कर लिया, जबकि कई अब पार्टी विरोधी गतिविधियों में जुटने की तैयारी में हैं। नाम वापसी की अंतिम तिथि तक राजनीतिक घटनाक्रम में और बदलाव की संभावना है। फिलहाल चुनावी माहौल पूरी तरह गर्म हो चुका है और साम, दाम, दंड, भेद जैसी सभी रणनीतियाँ अपनाई जाने की आशंका है।
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सभी दलों के लिए आत्म-परीक्षण का समय
गोंदिया जिले में गोंदिया और तिरोड़ा नगर परिषद, तथा गोरेगाँव और सालेकसा नगर पंचायत चुनावों के लिए 2 दिसंबर को मतदान होगा। गोंदिया को छोड़कर अधिकतर क्षेत्रों में टिकट को लेकर अधिक विवाद नहीं हुआ, लेकिन गोंदिया नगर परिषद विशेष रूप से भाजपा में भारी असंतोष देखने को मिला। लंबे समय से पार्टी के प्रति निष्ठावान और सक्रिय रहे कार्यकर्ताओं को टिकट सूची से बाहर रखा गया और विशेष वर्ग के उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी गई। इससे कई कार्यकर्ता नाराज़ हैं और भीतरखाने विद्रोह शुरू होने के संकेत मिल रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह समय सभी दलों के लिए आत्म-चिंतन और रणनीति सुधार का है, क्योंकि बाग़ावत और असंतोष चुनाव परिणामों को प्रभावित कर सकते हैं।
