गोंदिया अस्पताल का दृश्य (सोर्स: सोशल मीडिया)
Maharashtra Health News: चिकित्सा शिक्षा व अनुसंधान संचालनालय से संबद्ध शासकीय मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में जहां साफ-सफाई से लेकर परिचारक के काम तक का निजीकरण हो चुका है, वहीं सरकार ने मंगलवार को रोगी सेवा के निजीकरण का एक फैसला लिया। इसकी शुरुआत हृदय रोगों के इलाज से होगी।
राज्य के चिकित्सा शिक्षा विभाग के 11 अस्पतालों में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) के आधार पर कर्डियाक कैथ लैब युनिट्स स्थापित करने की प्रशासनिक मंजूरी मिल गई है। गोंदिया जिले के शासकीय मेडिकल कॉलेज को भी इसमें शामिल किया गया है। इससे गोंदिया जिले के साथ-साथ मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ से इलाज के लिए आने वाले मरीजों को अब भारी आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ेगी।
उल्लेखनीय है कि मई 2019 में शासकीय मेडिकल कॉलेजों के निजीकरण की योजना पेश की गई थी। चिकित्सा शिक्षा विभाग ने नाश्ता, भोजन, स्वच्छता, डायलिसिस, एक्स-रे, एमआरआई जैसी सेवाएं निजी कंपनियों को देने की योजना बनाई थी।
उस समय सभी स्तरों पर भारी विरोध के बाद इस योजना को रद्द कर दिया गया था, लेकिन अब पीपीपी के नाम पर गुपचुप तरीके से कर्डियाक कैथ लैब यूनिट, एनेस्थीसिया वर्कस्टेशन, इको मशीन जैसे महत्वपूर्ण चिकित्सा उपकरण लगाने के ठेके निजी कंपनियों को दिए जाएंगे।
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पीपीपी के माध्यम से सेवाएं देने का दावा किया जा रहा है, लेकिन इसमें शामिल निजी व्यवसायियों और कंपनियों का मुख्य उद्देश्य केवल लाभ कमाना है। अगर अस्पतालों का निजीकरण किया गया, तो आम मरीज पर आर्थिक बोझ पड़ेगा और वह इलाज से वंचित रह जाएंगे, ऐसी गंभीर चेतावनी स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञों ने दी है।
इस पीपीपी समझौते की अवधि 15 वर्ष (5 वर्ष और बढ़ाई जा सकती है) तक होगी। उल्लेखनीय है कि निजी आपूर्तिकर्ता केवल उपकरण लाएगा, लेकिन सरकारी अस्पताल में जगह, बिजली, पानी, ऑक्सीजन और अन्य बुनियादी सुविधाएं (यानी आम जनता के पैसे से) उपलब्ध कराई जाएंगी। इसका सीधा मतलब है कि सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल निजी लाभ के लिए किया जाएगा।