गोंदिया में मातोश्री पगडंडी योजना अधूरी, बरसात में किसानों की बढ़ी मुश्किलें
Gondia Incomplete Roads: गोंदिया में 'मातोश्री पगडंडी योजना' के काम अधूरे होने से खेतों के रास्तों पर कीचड़ जमा है। निधि की कमी व प्रशासनिक देरी से अटके इन कामों को पूरा करने की मांग उठ रही है।
- Written By: केतकी मोडक
अधूरी सड़क (सोर्स - फोटो नवभारत)
Matoshri Pagsarak Yojana Gondia: राज्य सरकार ने कृषि भूमि को विकसित करने और बाजार में कृषि उपज की समय पर पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से मातोश्री ग्रामसमृद्धि पगडंडी सड़क योजना शुरू की। हालांकि, जिले के कई गांवों में इस योजना के काम अभी भी अधूरे हैं और कुछ जगहों पर स्वीकृत सड़क के काम शुरू ही नहीं हुए हैं।
निधि की कमी, प्रशासनिक प्रक्रियाओं और तकनीकी कठिनाइयों के कारण कई पगडंडी सड़के अटकी हुई हैं। परिणामस्वरूप बरसात के दिनों में किसानों को खेतों तक पहुंचने के लिए कीचड़ से होकर गुजरना पड़ता है।हालांकि कुछ गांवों में सड़क का काम पूरा हो जाने से किसानों को राहत मिली है, लेकिन अधिकांश इलाकों में स्थिति बदहाल हो गई है। कृषि वस्तुओं के परिवहन के साथ-साथ कृषि मशीनरी के परिवहन में भी कठिनाइयां उत्पन्न हो रही हैं।
इसके चलते किसानों की मांग है कि काम तुरंत पूरा किया जाए। ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में ग्रामीण सड़कों की हालत खास तौर पर खराब है। किसानों का खेतों पर जाना भी मुश्किल हो गया है।
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लंबित निधि का समय पर उपलब्ध कराने की मांग
लंबित निधि समय पर उपलब्ध कराई जाए। अतिक्रमण की समस्या का समाधान स्थानीय स्तर पर किया जाना जरूरी है। ग्राम पंचायत, राजस्व व कृषि विभाग के समन्वय से कार्यों की नियमित निगरानी से परियोजनाओं को गति मिल सकती है। मनरेगा, जिला योजना समिति निधि और विभिन्न ग्रामीण विकास योजनाओं का उपयोग भी किसानों के काम के लिए किया जाता है।
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स्थानीय स्व-सरकारी निकायों के माध्यम से भी निधि उपलब्ध हो सकता है। अतिक्रमण हटाने, भूमि सर्वेक्षण प्रक्रिया और तकनीकी मंजूरी में देरी के विवादों के कारण काम रुका हुआ है। कुछ स्थानों पर निधि वितरण में देरी भी इसका कारण है।
किसानों को राहत देना जरूरी
पाढ़राबोड़ी किसान ईशुलाल चव्हाण ने कहा है कि “गोंदिया जिले के कई गांवों में पगडंडी सड़कों का काम रुका हुआ है। सड़क का काम पूरा कर किसानों को राहत देना जरूरी है। जिससे बारिश के दिनों में परेशानी का सामना न करना पड़े।”
