गोंदिया में जून में भी 41.9 डिग्री तापमान, मानसून की देरी से किसान चिंतित

Gondia Heatwave: गोंदिया में जून के अंत में भी भीषण गर्मी जारी है, जहां तापमान 41.9°C दर्ज हुआ। मानसून की देरी व अल नीनो के चलते कृषि विभाग ने जल्दबाजी में बुआई न करने की सलाह दी है।
Monsoon Delay In Gondia
भारत तापमान का मानचित्र (सोर्स - Windy)
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Monsoon Delay In Gondia: जून माह आधे से अधिक बीत जाने के बावजूद गोंदिया जिले में मानसून की प्रतीक्षा खत्म नहीं हुई है। बारिश के मौसम में भी तेज गर्मी और लू के कारण जनजीवन प्रभावित हो रहा है। 20 जून को जिले का अधिकतम तापमान 41.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से काफी अधिक माना जा रहा है। सूरज की तपिश और दोपहर के समय चल रही गर्म हवाओं ने लोगों का घरों से बाहर निकलना मुश्किल कर दिया है।

मौसम में आए बदलाव और ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव के कारण इस वर्ष मानसून की रफ्तार धीमी दिखाई दे रही है। मानसून पूर्व बारिश नहीं होने से खरीफ सीजन की तैयारियों पर भी असर पड़ा है। जिले के अधिकांश किसानों ने खेतों को बुआई और रोपाई के लिए तैयार कर लिया है, लेकिन मिट्टी में नमी नहीं होने के कारण बुआई शुरू नहीं हो सकी है।

किसान कम अवधि में तैयार होने वाली धान के किस्मों को प्राथमिकता दें : कृषि विभाग

किसान सुबह जल्दी खेतों में पहुंचकर काम कर रहे हैं और तेज धूप बढ़ने से पहले वापस लौट आते हैं। शाम को भी पांच बजे के बाद ही खेतों में गतिविधियां शुरू हो रही हैं। बारिश में हो रही देरी के कारण खरीफ फसलों की बुआई प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। विशेष रूप से तुअर और मूंग जैसी फसलों के उत्पादन पर इसका असर पड़ सकता है। हालांकि कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि धान की देर से बुआई होने पर उत्पादन पर बहुत अधिक प्रभाव नहीं पड़ेगा, लेकिन किसानों को कम अवधि में तैयार होने वाली धान की किस्मों को प्राथमिकता देनी चाहिए।

75-100 मिमी बरसात जरूरी, जल्दबाजी में बुआई न करें

गोंदिया जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी निलेश कानवडे ने कहा है कि "मुख्य फसल की बुआई करने के पहले 75 से 100 मिमी बारिश होना आवश्यक है। जब तक आवश्यकता के अनुसार बारिश नहीं हो जाती, तब तक बुआई न की जाए। इस वर्ष कम कालावधि में आने वाली व कम पानी की फसलों का उत्पादन लिया जाए। खेतों में रासायनिक खाद का अत्याधिक उपयोग टाला जाए, इसके बजाय जैविक, कंपोष्ट व निंबोली पेडी का उपयोग किया जाए, मौसम में बदलाव की वजह से कीटों का प्रकोप बढ़ने की संभावना है। फसलों पर नियमित ध्यान दिया जाए, फसलों पर बीमारी या फिर कीटों का प्रकोप दिखाई देने पर तत्काल कृषि अधिकारी से संपर्क करें, धान फसल का उत्पादन लेने के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग करें।"

अल नीनो के संभावित प्रभाव से लोगों की चिंता बढ़ी

पिछले कुछ दिनों से शाम के समय आसमान में बादल छाने से बारिश की उम्मीद जगती है, लेकिन बादल बिना बरसे ही छूट जाते हैं। सुबह फिर मौसम साफ हो जाता है, जिससे उमस और गर्मी और बढ़ जाती है। इस बीच खरीफ सीजन पर अल नीनों के संभावित प्रभाव ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। मौसम विभाग के अनुसार अल नीनो के कारण वर्षा में कमी, अनियमित बारिश तथा औसत से कम वर्षा होने की संभावना बनी हुई है। कृषि विभाग ने किसानों से बुआई से पहले उचित नियोजन करने तथा विभाग द्वारा जारी मार्गदर्शक सूचनाओं के अनुसार खेती प्रबंधन करने की अपील की है।

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