प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सोशल मीडिया)
Gondia Gharkul Yojana News: एक ओर सरकार ‘हर हाथ को काम और हर सिर पर छत’ का नारा बुलंद करते हुए प्रधानमंत्री आवास योजना, मोदी आवास, रमाई और शबरी आवास जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं का बखान कर रही है। वहीं दूसरी ओर, धरातल पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है। गोंदिया जिले में सरकारी तंत्र की सुस्ती और निधि के अभाव ने हजारों गरीबों के अपने घर के सपने को अधर में लटका दिया है।
ताजा आंकड़ों के अनुसार, गोंदिया जिले में कुल 42,551 लाभार्थियों के घरों का काम पिछले छह महीनों से रुका हुआ है। कई लाभार्थी ऐसे हैं जिन्हें सिर्फ पहली किश्त मिली है, जिसके बाद निर्माण कार्य ठप पड़ा है। स्थिति इतनी विकट है कि ग्रामीण इलाकों के लोग अपना अधूरा घर पूरा करने के लिए साहूकारों से ऊंचे ब्याज पर कर्ज लेने को मजबूर हैं।
न केवल निर्माण की किश्तें, बल्कि मनरेगा के तहत मिलने वाली करीब 18,000 रुपये की मजदूरी (मस्टर) भी पिछले 4 से 6 महीनों से अटकी हुई है। मस्टर ऑनलाइन फीड होने के बावजूद फंड की कमी के कारण मजदूरों के खातों में पैसा नहीं पहुंच रहा है।
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जिला ग्रामीण विकास यंत्रणा की प्रकल्प संचालक प्रमिला जाखलेकर का कहना है कि रेत की कमी दूर होने के बाद अब काम में थोड़ी तेजी आई है और जिला 37.75% लक्ष्य पूरा कर राज्य में पहले स्थान पर है। हालांकि, लाभार्थियों का दर्द कुछ और ही है। झांजिया निवासी लाभार्थी धनवंता राउत और मुनेश्वर कोल्हारे ने बताया कि किश्तें न मिलने से घर का ढांचा खड़ा रह गया है और वे अब उधारी के बोझ तले दब रहे हैं।