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धान के बाद अब ‘लाख’ की खेती से आर्थिक रूप से मजबूत हो रहे किसान; पलास और बेर के पेड़ों पर हो रहा उत्पादन

Gondia Lac Production: गोंदिया के किसान पारंपरिक धान की खेती के साथ अब लाख उत्पादन को अपना रहे हैं। पलास और बेर के पेड़ों पर मई-जून में बीज रोपकर किसान अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रहे हैं।

  • Author By Manoj Akotkar | published By रूपम सिंह |
Updated On: Apr 30, 2026 | 04:49 PM

लाख की खेती (सोर्स- नवभारत)

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Gondia Lac Cultivation: गोंदिया जिले में मुख्य रूप से चावल की खेती होती है। लेकिन किसानों को इस खेती में अपेक्षित लाभ नहीं मिलने के कारण, कई किसान अब विभिन्न फसलों की खेती करने लगे हैं। ऐसा देखा गया है कि अधिकांश किसानों ने पारंपरिक खेती को छोड़कर व्यावसायिक खेती की ओर रुख किया है। गोंदिया जिले के कई किसान लाख की खेती की ओर मुड़े हैं और इसके माध्यम से वे आर्थिक लाभ ले रहे हैं। जिले में मुख्य रूप से खरीफ और गर्मी के मौसम में धान का उत्पादन होता है।

यहां के किसान और मजदूर खेती पर निर्भर हैं। वर्ष भर उनके लिए रोजगार का कोई साधन नहीं होने के कारण वे विभिन्न मौसमी कृषि उत्पादन लेते हैं। उनमें से एक लाख का उत्पादन है। आज यह व्यवसाय ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों के लिए आर्थिक मजबूती बन गया है।

गोंदिया जिले में धान की खेती से अपेक्षित मुनाफा नहीं मिल रहा है। प्राकृतिक आपदाओं के कारण कृषि की भारी हानि के कारण किसानों की आर्थिक स्थिति दिनबदिन खराब होती जा रही है। धान की खेती के पूरक व्यवसाय के रूप में किसान खेत में पलास व बेर के पेड़ों पर लाख का उत्पादन कर रहे हैं।

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इसके लिए बड़े निवेश की आवश्यकता नहीं है। पलास और बेर के पेड़ों की शाखाओं पर लाख के बीज मईजून के महीने में रोपे जाते हैं। चारपांच महीने के बाद पेड़ों की शाखाओं पर हर जगह लाख लग जाते हैं। यह लाख नवंबरदिसंबर के महीने में निकाला जाता है।

लाख उत्पादन से आर्थिक सहयोगलाख का सर्वाधिक उत्पादन गोरेगांव, सालेकसा, आमगांव, देवरी के वनाच्छादित तहसील में होता है। गोंदिया, सड़क अर्जुनी, तिरोड़ा, अर्जुनी मोरगांव तहसील में भी कुछ क्षेत्रों में किसान लाख का उत्पादन करते हैं। लाख उत्पादन से किसानों को आर्थिक सहयोग मिलता है।

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Published On: Apr 30, 2026 | 03:03 PM

Topics:  

  • Farming
  • Gondia News
  • Maharashtra News

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