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गोंदिया जिले में रिश्वतखोरी के मामलों में पंचायत समिति कार्यालय सबसे आगे रहा। यहां 15 एसीबी ट्रैप कार्रवाई हुईं।
वर्ष 2021 से अगस्त 2026 तक एसीबी ने 90 अधिकारी-कर्मचारियों और 19 निजी व्यक्तियों को रिश्वतखोरी के मामलों में पकड़ा।
पंचायत समिति के बाद राजस्व विभाग में रिश्वतखोरी के मामले सामने आए।
Bribery Cases In Gondia: सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार की समस्या नई नहीं है। आम लोगों का अनुभव है कि बिना लेन-देन के लालफीताशाही में फंसी फाइलें आगे नहीं बढ़तीं। गोंदिया जिले में भ्रष्टाचार निरोधक विभाग (एसीबी) की पिछले कुछ वर्षों की सफल कार्रवाई से भी इस स्थिति का खुलासा हुआ है। वर्ष 2021 से अगस्त 2026 तक के आंकड़ों पर नजर डाले तो पंचायत समिति कार्यालय रिश्वतखोरी के मामलों में पहले स्थान पर है। एसीबी की कार्रवाई में अकेले पंस कार्यालय से जुड़े 15 मामलों में जाल बिछाकर सफल कार्रवाई की गई।
इसके बाद राजस्व विभाग का स्थान है। इससे सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार की समस्या की गंभीरता सामने आई है। सरकारी व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार उजागर एसीबी ने वर्ष 2021 से 2026 के दौरान विभिन्न सरकारी कार्यालयों में जाल बिछाकर कार्रवाई की। इन कार्रवाइयों में 90 अधिकारी कर्मचारियों के साथ 19 निजी व्यक्तियों को भी रिश्वतखोरी के मामलों में पकड़ा गया। विभाग की कार्रवाई से सरकारी व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार उजागर हुआ है। खास बात यह है कि रिश्वतखोरी के मामलों में पंस कार्यालय सबसे आगे रहा।
पिछले पांच से छह वर्षों के दौरान अकेले इस कार्यालय से जुड़े 15 मामलों में कार्रवाई की गई। 2 आरोपियों को सजा पिछले पांच वर्षों में न्यायालय ने 12 आरोपियों को बरी किया, जबकि दो आरोपियों को सजा सुनाई। वर्ष 2021 में एक आरोपी को सजा हुई, जबकि चार आरोपियों को बरी किया गया। वर्ष 2022 में तीन आरोपियों को दोषमुक्त किया गया। वर्ष 2023 में एक आरोपी को बरी किया गया, जबकि एक को सजा सुनाई गई। वर्ष 2024 में एक आरोपी को निर्दोष मुक्त किया गया। वहीं, वर्ष 2025 में तीन आरोपियों को बरी किया गया।
भ्रष्टाचार निरोधक विभाग के पास रिश्वतखोरी की शिकायत करने वालों की संख्या आज भी अपेक्षाकृत कम है। कई लोग यह सोचकर शिकायत करने से बचते हैं कि किसी की रोजी-रोटी पर आंच क्यों लाई जाए। लेकिन रिश्वत मांगने के मामले में सरकारी अधिकारी, कर्मचारी और कानून के दायरे में आने वाले अन्य संबंधित व्यक्ति भी कार्रवाई के पात्र हो सकते हैं। हर नागरिक को कभी न कभी सरकारी कार्यालय में किसी काम के लिए जाना पड़ता है। यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी नियमानुसार होने वाले सरकारी काम के बदले रिश्वत मांगता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
इस वर्ष भी राजस्व विभाग, पंचायत समितियों, स्थानीय स्वशासी संस्थाओं और अन्य विभागों के अधिकारी-कर्मचारी रिश्वतखोरी के मामलों में फंसते रहे हैं। मामला दर्ज होने के बाद जमानत मिल जाती है और जांच पूरी होने तक कई मामलों में संबंधित कर्मचारी सेवा में बने रहते हैं।
लेकिन रिश्वत लेते पकड़े जाने से पहले कार्यालय, समाज और परिवार में उनकी जो प्रतिष्ठा होती है, वह बाद में काफी हद तक प्रभावित होती है। जिले में हर वर्ष रिश्वतखोरी के मामले सामने आते हैं। पुलिस और राजस्व विभाग में रिश्वतखोरी की शिकायतें भी लगातार चर्चा में रहती हैं। यदि न्याय दिलाने की जिम्मेदारी निभाने वाले ही रिश्वत लेकर अन्याय करने लगें, तो व्यवस्था पर आम लोगों का भरोसा कमजोर होना स्वाभाविक है।
भ्रष्टाचार निरोधक विभाग गोंदिया के अपर पुलिस अधीक्षक उमाकांत उगले ने कहा कि कानूनी काम नियमानुसार होने के बावजूद जानबूझकर आम नागरिकों को परेशान किया जाता है। रिश्वत लेना और देना, दोनों अपराध है। यदि कोई रिश्वत की मांग करता है, तो इसकी शिकायत करें। रिश्वतखोरी के मामले में पकड़े जाने पर आय से अधिक अर्जित संपत्ति जब्त की जाती है। सभी रिश्वतखोरी मुक्त राज्य बनाने का संकल्प ले।