चिचगढ़ क्षेत्र में फसलें जलमग्न, निष्पक्ष आकलन कर मुआवजा देने की मांग

Chichgarh Crop Damage: गोंदिया जिले के चिचगढ़ क्षेत्र में बेमौसम बारिश से धान की फसलें जलमग्न हो गईं। किसानों ने नुकसान का निष्पक्ष आकलन कर तुरंत मुआवजा देने की मांग की है।
चिचगढ़ क्षेत्र में फसलें जलमग्न
चिचगढ़ क्षेत्र में फसलें जलमग्न (सौजन्यः सोशल मीडिया)
Published on
Updated on

Gondiua News: गोंदिया जिले में 26 और 27 अक्टूबर को हुई बेमौसम बारिश के कारण देवरी तहसील के चिचगढ़ क्षेत्र में धान की फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। कई किसानों की तैयार फसलें जलमग्न हो गईं, जिससे उनकी आजीविका पर संकट मंडरा रहा है। किसानों ने मांग की है कि प्रशासन नुकसान का निष्पक्ष आकलन कर तत्काल मुआवजा प्रदान करे।

अक्टूबर माह में तीन बार हुई बेमौसम बारिश ने खरीफ सीजन की फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया। कटाई के बाद खलिहानों में रखी धान की फसलें बारिश में भीगकर खराब हो गईं। इससे किसानों की लागत वसूलने की संभावना भी समाप्त हो गई है। पहले से ही पशुचारे की समस्या झेल रहे किसानों के सामने अब आर्थिक संकट गहराता जा रहा है।

प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण

30 अक्टूबर को विधायक संजय पुराम ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर किसानों से मुलाकात की। उन्होंने स्थिति का जायजा लेते हुए किसानों को उचित मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया। नुकसान के सर्वेक्षण को लेकर चिचगढ़ के अपर तहसीलदार नवनाथ कातकरे ने बताया कि पटवारी, कृषि सहायक और ग्राम सेवक के माध्यम से नुकसान का आकलन किया जा रहा है। वहीं नायब तहसीलदार संतोष मांडवे और वरिष्ठ लिपिक राजू रहांगडाले भी प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर रहे हैं।

आंदोलन की चेतावनी

किसानों ने सरकार से मांग की है कि बेमौसम बारिश से हुई फसल क्षति का मुआवजा जल्द घोषित किया जाए। अन्यथा जिला परिषद सदस्य उषा शहारे, जिप सदस्य राधिका धमरगुडे, पंचायत समिति सदस्य रंजीत कासम और अनुसया मडावी ने आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com