128 शालाओं में 950 प्रवेश पूर्ण, सभी चरण होने के बाद भी 61 सीटें खाली, स्कूलों में 25% फ्री प्रवेश
Gondia School Admission: शैक्षणिक सत्र शुरू होने के ढाई महीने बाद भी, गोंदिया जिले में आरटीई प्रवेश के सभी चरण पूरे होने के बाद भी 61 सीटें खाली हैं।
- Written By: प्रिया जैस
गोंदिया न्यूज (सौजन्य-नवभारत)
Gondia News: निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अनुसार, वंचित और कमजोर वर्ग के छात्रों को 25 प्रतिशत। निःशुल्क प्रवेश दिया जाता है। गोंदिया जिले के 128 आरटीई पात्र स्कूलों में 1,011 छात्र हैं। जिसके अनुसार, इन स्कूलों में 25 प्रतिशत निःशुल्क प्रवेश के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया लागू की गई थी। इसके लिए लगभग 3,304 आवेदन ऑनलाइन जमा किए गए थे।
माता-पिता द्वारा एसएमएस प्राप्त करने के बाद समय पर प्रवेश पूरा न करना, आवासीय प्रमाण पत्र, आधार कार्ड का मिलान न होना, जन्मतिथि प्रमाण पत्र और अन्य प्रमाण पत्रों का उपलब्ध न होना, पसंदीदा स्कूल न मिलना आदि कारणों से सीटें खाली रह जाती हैं। यदि प्रवेश के लिए एसएमएस के साथ-साथ फोन के माध्यम से सीधे संपर्क की व्यवस्था की जाए, तो अभिभावक त्वरित कार्रवाई कर सकेंगे। चयनित बच्चों के अभिभावक प्रवेश दौर के बाद देर से संपर्क करते हैं। स्कूल में सीटें भी रिक्त हैं।
लेकिन इस विशेष मामले को ध्यान में रखते हुए, यदि चयन संख्या के साथ देरी का कारण बताया जाता है, तो एनआईसी या निदेशक स्तर पर अनुमति देने की व्यवस्था की जानी चाहिए। यदि शिक्षाधिकारियों को दौर समाप्त होने के बाद 3 दिनों की एक निश्चित अवधि के भीतर ऐसे प्रवेशों के लिए अधिकार दिए जाते हैं, तो रिक्त सीटों की संख्या और कम हो सकती है और पात्र बच्चों को भी प्रवेश मिल सकता है।
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RTE प्रवेश में समाधान
प्रतिशतासनिक प्रक्रिया सरल हो जिसमें ऑनलाइन पंजीकरण को सहज और आसानी होगी। स्कूलों को प्रोत्साहन देने की जरूरत है जिससे प्रवेश लेने वाले स्कूलों को अतिरिक्त वित्तीय या मान्यता संबंधी लाभ मिले। अभिभावकों में जागरूकता लाना जिससे RTE की जानकारी और मार्गदर्शन के लिए जागरूकता अभियान को बढ़ावा देने की जरूरत है वहीं स्कूल, ग्राम पंचायत और अभिभावक मिलकर बच्चों के प्रवेश सुनिश्चित करें। साथ ही निगरानी और कड़े निर्देश कर ध्यान दें जिससे शिक्षा विभाग द्वारा समय-समय पर स्कूलों में प्रवेश की निगरानी की जा सके।
अभिभावकों में असंतोष बढ़ रहा
इन सुविधाओं के बावजूद कई स्कूल RTE प्रवेश लेने में संकोच कर रहे हैं। कुछ स्कूलों का तर्क है कि RTE के तहत मिलने वाली अनुदान राशि पर्याप्त नहीं है और प्रतिशतासनिक प्रक्रियाएं जटिल हैं। वहीं, कुछ स्कूलों को अभिभावकों और समुदाय से सहयोग की कमी का सामना करना पड़ता है।
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गोंदिया जिले के कई ग्रामीण और शहरी स्कूलों में आरटीई की सीटें भरी नहीं जा रही हैं। इससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चे शिक्षा से वंचित हो रहे हैं। स्कूलों का यह रवैया बच्चों के भविष्य और समाज के शैक्षणिक स्तर पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। अभिभावकों में असंतोष बढ़ रहा है क्योंकि वे बच्चों के प्रवेश के लिए लंबे समय से प्रयास कर रहे हैं।
