खेती के साथ ‘रेशमी’ मुनाफा! गोंदिया में दोगुनी हुई शहतूत की खेती, जानें कैसे बदल रही जिले की तस्वीर
Resham Udyog Maharashtra: गोंदिया में रेशम उद्योग की धूम! शहतूत की खेती से किसान कमा रहे सालाना 3 लाख तक। जानें महारेशम अभियान और सरकारी सब्सिडी का लाभ कैसे उठाएं। पूरी रिपोर्ट।
- Written By: प्रिया जैस
रेशम उद्योग (सौजन्य-नवभारत)
Gondia Sericulture News: खेती के साथ ही किसानों को पूरक उद्योग के लिए रेशम उद्योग जिले में जोर पकड़ने लगा है। जिले के आठ में से सात तहसीलों में रेशम (शहतूत) की खेती हो रही है और यह खेती दोगुनी हो गई है। इससे जिले में रेशम उद्योग को बढ़ाने में मदद मिलेगी। वहीं, जिले के गोरेगांव तहसील में सबसे ज्यादा शहतूत की खेती हुई है।
राज्य सरकार के रेशम संचालनालय किसानों को शहतूत की खेती के साथ-साथ कीट नर्सरी लगाने के लिए प्रोत्साहनात्मक योजना चला रहा है। इसमें मनरेगा और रेशम संलग्न योजना को शामिल किया गया है। इस योजना के जरिए किसानों को तीन साल के लिए प्रति एकड़ 3 लाख 39 हजार 782 रु. की सब्सिडी दी जाती है।
महारेशम अभियान तहसीलों में होगा लागू
जिले के गोरेगांव तहसील में सबसे ज्यादा व गोंदिया तहसील में भी हुई है। देवरी तहसील इस खेती से वंचित है, और पहली बार सड़क अर्जुनी तहसील के खोडशिवनी गांव में किसान राजेंद्र परशुरामकर ने 100 अंडे की पूज बैच शुरू की है। अब किसानों का रेशम उद्योग की ओर रुझान बढ़ा है, और इस उद्योग को बढ़ावा देने के लिए महारेशम अभियान चलाया जा रहा है। यह अभियान सभी तहसीलों में लागू किया जाएगा।
सम्बंधित ख़बरें
छुट्टी पाने के लिए कैदियों का कारनामा, मोर्शी ओपन जेल में फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट का खुलासा
अकोला में बाल विवाह रोका, महिला एवं बाल विकास विभाग का बड़ा हस्तक्षेप, समारोह से जुड़े लोगों को भी नोटिस जारी
महापौर बंगले का नूतनीकरण, अपने नगरसेवकों पर भड़के उद्धव, जनता के पैसों के अपव्यय पर लताड़ा
‘अब आया ऊंट पहाड़ के नीचे’, अशोक खरात का शिर्डी जमीन धोखाधड़ी मामले में कबूलनामा
रेशम कार्यालय के क्षेत्र सहायक ज्ञानेश्वर भैरम ने कहा कि जिले में किसान पिछले कुछ सालों से रेशम उद्योग की ओर रुख करने लगे हैं। यह उद्योग आसान है। इसलिए, गृहिणियां और बुजुर्ग भी इस उद्योग से जुड़े हैं। इस उद्योग के लिए कम से कम पांच से साढ़े पांच हजार पौधे लगाने पड़ते हैं। रेशम की अच्छी कीमत भी मिलती है।
औसतन, एक एकड़ से हर साल 2.5 से 3 लाख रुपये की आय हो सकती है। साल में चार से पांच फसलें उगाई जा सकती हैं। इसलिए, भैरम ने किसानों से भी इस उद्योग की ओर रुख करने की अपील की। जिले में 2017 से महारेशिम अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान को किसानों से अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है और इस साल 100 एकड़ में रेशम उत्पादन की योजना बनाई गई है। इस अभियान ने रेशम उद्योग को और जनाभिमुखी बनाने में मदद मिली है।
यह भी पढ़ें – उद्धव ठाकरे फिर बनेंगे MLC? महाराष्ट्र की राजनीति में आया बड़ा मोड़, संजय राउत ने ठोकी मजबूत दावेदारी
एक एकड़ से 3 लाख रूपए तक की आय
रेशम उद्योग को शुरू करते समय उसे बढ़ावा देना जरूरी है। औसतन, एक एकड़ से हर साल 2.5 से 3 लाख रुपये की आय हो सकती है। साल में चार से पांच फसलें उगाई जा सकती हैं। इसलिए, किसानों को इस उद्योग की ओर रुख करना चाहिए।
- ज्ञानेश्वर भैरम, क्षेत्र सहायक, रेशम जिला कार्यालय, गोंदिया
गोरेगांव तहसील में सबसे ज्यादा खेती
जिले के गोरेगांव तहसील में सबसे ज्यादा किसान रेशम उद्योग से जुड़े हैं। जिले का सिर्फ देवरी तहसील ही इस उद्योग में नहीं है। किसानों को खुशहाल बनाने के लिए, सभी तहसील में महारेषिम अभियान लागू किया जाएगा। जिले में 45 किसान 47 एकड़ में रेशम की खेती करते हैं। इस साल इसमें बढ़ोतरी हुई है।
