आरक्षण पर आर-पार! बंजारा समाज को ST में शामिल करने का विरोध; नेशनल पीपल फेडरेशन ने दी आंदोलन की चेतावनी

Banjara Community ST Status: बंजारा समाज को ST में शामिल करने के लिए गठित समिति का विरोध। नेशनल पीपल फेडरेशन ने दी आंदोलन की चेतावनी। "आदिवासियों के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं।"
National People Federation demands cancellation of the committee formed to include Banjara community in ST category. Warns of state-wide protests.
बंजारा समिति रद्द करने की मांग (सौजन्य-नवभारत)
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National People Federation: नेशनल पीपल फेडरेशन द्वारा बंजारा समाज को अनुसूचित जनजाति (एसटी) में शामिल करने के लिए गठित समिति को तत्काल रद्द करने की मांग को लेकर सरकार को कड़ी चेतावनी दी गई है। संगठन की ओर से सालेकसा तहसीलदार के माध्यम से मुख्यमंत्री, दोनों उपमुख्यमंत्री तथा आदिवासी विकास मंत्री को ज्ञापन सौंपते हुए चेतावनी दी गई कि यदि समिति को जल्द रद्द नहीं किया गया तो राज्यव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा।

ज्ञापन में बताया गया कि राज्य सरकार ने 27 फरवरी 2026 को बंजारा समाज को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने के संबंध में एक समिति का गठन किया है। नेशनल पीपल फेडरेशन का कहना है कि आदिवासियों को मिलने वाला आरक्षण संविधान के तहत पांचवीं अनुसूची के आधार पर दिया गया है और यह आरक्षण केवल वास्तविक आदिवासी समाज के लिए ही सुरक्षित रहना चाहिए।

आदिवासी समाज के साथ हुआ अन्याय

संगठन ने आरोप लगाया कि पहले से ही कई लोगों ने फर्जी जाति प्रमाणपत्र के आधार पर आदिवासी आरक्षण का लाभ लेकर लाखों सरकारी नौकरियां हासिल कर ली हैं। ऐसे फर्जी कर्मचारियों को सेवा संरक्षण देकर सरकार ने आदिवासी समाज के साथ बड़ा अन्याय किया है। इसके अलावा फर्जी आदिवासियों द्वारा कब्जा की गई रिक्त पदों को अभी तक भरने की प्रक्रिया भी पूरी नहीं की गई है।

ज्ञापन में यह भी कहा गया कि आदिवासी समाज को 7 प्रश. आरक्षण मिलने के बावजूद आज भी समाज का बड़ा वर्ग विकास की मुख्यधारा से दूर है और कई मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। इसलिए यदि आदिवासी समाज का वास्तविक विकास करना है तो आदिवासी आरक्षण का लाभ केवल आदिवासियों को ही मिलना चाहिए।

बंजारा समाज को अनुसूचित जाति में शामिल करने का विरोध

फेडरेशन ने हैदराबाद गजट के आधार पर बंजारा समाज को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने का विरोध करते हुए सरकार से गठित समिति को तुरंत रद्द करने की मांग की है। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि इस मांग पर ध्यान नहीं दिया गया तो आदिवासी समाज राज्यभर में तीव्र आंदोलन छेड़ेगा।

इस अवसर पर गोंदिया की कार्याध्यक्ष व पंस सदस्य सालेकसा अर्चना मडावी, शकुनबाई परतेती, देवराज मरस्कोल्हे, मनीष पुसाम, रामदास वरखडे, वनिता सिरसाम, रहिस पंधरे, सुभाष टेकाम, अनुसया पंधरे, प्रवीण परतेती, मिलिंद मडावी, सुरलाल मडावी, सरिता परतेती, अनुर दररो सहित समाज के अनेक पदाधिकारी और नागरिक उपस्थित थे।

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