50 बेड का अस्पताल फिर भी विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं, गड़चिरोली के ग्रामीण इलाको में स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग तेज
Gadchiroli Health Facilities: सिरोंचा तहसील के ग्रामीण अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं, रिक्त पद भरे नहीं। मरीज तेलंगाना-आंध्र के अस्पतालों में जाने को मजबूर, उपजिला अस्पताल का दर्जा मांग अधर में।
- Written By: केतकी मोडक
सिरोंचा ग्रामीण अस्पताल (सोर्स- फोटो नवभारत)
Gadchiroli Rural Hospital Doctor Shortage: गड़चिरोली जिले के अंतिम छोर पर बसे तहसील मुख्यालय सिरोंचा शहर और ग्रामीण क्षेत्र के मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए ‘ग्रामीण अस्पताल’ का निर्माण किया गया था। इस ग्रामीण अस्पताल में आवश्यक आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ ही इसे ‘उपजिला अस्पताल’ (Sub-District Hospital) का दर्जा देने की मांग पिछले अनेक वर्षों से तहसील के नागरिकों द्वारा की जा रही है। लेकिन सरकार और प्रशासन की उदासीनता के चलते यह मांग पिछले कई सालों से धूल फांक रही है।
वर्तमान में तहसील के मरीजों को सिरोंचा मुख्यालय स्थित इसी ग्रामीण अस्पताल से स्वास्थ्य सेवाएं दी जा रही हैं। इस तहसील के दुर्गम और सुदूर क्षेत्रों में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। समय पर उचित उपचार न मिलने के कारण अब तक अनेकों को अपनी जान गंवानी पड़ी है।
ऐसी गंभीर स्थिति के बावजूद स्वास्थ्य समस्याओं को हल करने की दिशा में सरकार की ओर से लगातार अनदेखी हो रही है। कुछ वर्ष पहले सरकार ने इस अस्पताल को उपजिला अस्पताल का दर्जा देने की मंजूरी दी थी, लेकिन यह प्रशासनिक प्रक्रिया आज भी अधर में लटकी हुई है।
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तहसील के नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए तत्कालीन सरकार ने सिरोंचा में इस ग्रामीण अस्पताल का निर्माण किया था। इससे पहले ग्रामीण अस्पताल का संपूर्ण कामकाज पुराने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से चलता था। वह इमारत ब्रिटिशकालीन और काफी जर्जर होने के कारण मरीजों के इलाज के लिए उपयुक्त नहीं थी, जिसके चलते पुरानी इमारत के सामने ही वर्ष 1994 में ग्रामीण अस्पताल की नई इमारत का निर्माण किया गया। शुरुआत में इस अस्पताल में चिकित्सा अधिकारियों (डॉक्टरों) समेत सभी आवश्यक कर्मचारियों के पद भी भरे गए थे, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यहाँ की चिकित्सा सेवाओं को जैसे ग्रहण लग गया है।
रेफर करने का सिलसिला जारी
50 बिस्तरों (बेड) की क्षमता वाले इस ग्रामीण अस्पताल में वर्तमान स्थिति में एक भी विशेषज्ञ (तज्ञ) चिकित्सक उपलब्ध नहीं है। इसके साथ ही कई अन्य महत्वपूर्ण पद भी लंबे समय से रिक्त पड़े हैं। इसका नतीजा यह हो रहा है कि सामान्य उपचार के लिए भी मरीजों को पड़ोसी राज्य तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है। इस लचर व्यवस्था के कारण आम मरीजों और विशेषकर गर्भवती महिलाओं को भारी मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है। तहसील के नागरिकों ने एक बार फिर मांग दोहराई है कि अस्पताल के रिक्त पदों को तुरंत भरकर यहाँ सभी आधुनिक सुविधाएं दी जाएं और इसे उपजिला अस्पताल का दर्जा दिया जाए।
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मरीजों को तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के अस्पतालों का सहारा
सिरोंचा ग्रामीण रुग्णालय ने कहा है कि “वर्तमान स्थिति में सिरोंचा के ग्रामीण अस्पताल को रिक्त पदों का ग्रहण लगा हुआ है। बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव और समय पर इलाज न मिलने से तहसील के गरीब मरीजों को मानसिक और आर्थिक रूप से भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। हालांकि, सिरोंचा तहसील की सीमा पर बहने वाली नदियों पर पुलों का निर्माण होने से अब मरीजों को थोड़ी राहत मिली है और वे इलाज के लिए महाराष्ट्र के बड़े शहरों में जाने के बजाय सीधे तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के नजदीकी अस्पतालों का सहारा ले रहे हैं।”
