साखरा जिला परिषद (सौजन्य-नवभारत)
Child Rights Protection Commission: गड़चिरोली तहसील में गड़चिरोली-नागपुर राज्य राष्ट्रीय महामार्ग 353-सी पर स्थित साखरा गांव के जिला परिषद स्कूल में छात्रों के सुरक्षा का मुद्दा गंभीर बना है। इस संदर्भ में ज्ञापन सौंपने के बाद इसकी राज्य राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने सुध लेते हुए एक सप्ताह के भीतर उपाय योजना करने के निर्देश संबंधितों को दिए हैं।
गड़चिरोली तहसील के आरमोरी मार्ग पर साखरा गांव की जिला परिषद उच्च प्राथमिक शाला राष्ट्रीय महामार्ग से केवल 20 फीट की दूरी पर स्थित है। इसके कारण स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है। साखरा गांव इस राज्य राजमार्ग के दोनों ओर बसा हुआ है और इस मार्ग से दिनभर हल्के व भारी वाहन तेज गति से आवागमन करते रहते हैं।
जिससे प्रतिदिन स्कूल आने-जाने वाले विद्यार्थियों को सड़क पार करते समय भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। विशेष रूप से सुबह स्कूल शुरू होने के समय और दोपहर में छुट्टी के दौरान वाहनों की आवाजाही अत्यधिक बढ़ जाती है।
इस समय छोटे बच्चे, शिक्षक एवं अभिभावक जब सड़क पार करते हैं, तो अत्यंत जोखिमपूर्ण स्थिति बन जाती है। स्कूल के सामने न तो कोई स्थायी गति अवरोधक (स्पीड ब्रेकर) है, न ही गति सीमा दर्शाने वाले संकेतक बोर्ड या अन्य ठोस यातायात सुरक्षा व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं। इससे दुर्घटना होने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता।
पूर्व में भी कई बार दुर्घटनाएं होते-होते टली हैं, जिससे अभिभावकों में भय का वातावरण बना हुआ है। इस गंभीर स्थिति को ध्यान में रखते हुए साखरा निवासी दिनेश बोरकुटे ने 20 सितंबर 2025 को राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग, मुंबई के समक्ष एक ज्ञापन पेश किया था। इस ज्ञापन में स्कूल की सड़स से सटी हुई स्थिति, विद्यार्थियों को होने वाले जोखिम तथा बच्चों की सुरक्षा के लिए तत्काल उपायों की आवश्यकता को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया गया था।
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साथ ही स्कूल के सामने स्थायी गति अवरोधक लगाने एवं आवश्यक सुरक्षा व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने की मांग की गई थी। राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने इस ज्ञापन को गंभीरता से लेते हुए इसे बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा अत्यंत महत्वपूर्ण विषय माना है।
इसके अनुसार आयोग ने 1 जनवरी 2026 को निर्माण विभाग के कार्यकारी अभियंता को आधिकारिक पत्र भेजकर इस प्रकरण में आवश्यक कार्रवाई कर 7 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट आयोग को प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। आयोग के इस हस्तक्षेप से प्रशासनिक स्तर पर कार्यवाही में तेजी आने की संभावना बनी है।
स्कूल परिसर में सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना शासन एवं प्रशासन की जिम्मेदारी है, विशेषकर ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों में बच्चों के जीवन की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाना आवश्यक है। राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की कार्रवाई से साखरा स्थित स्कूल के सामने उत्पन्न इस समस्या को प्रशासनिक स्तर पर गंभीरता से उठाया गया है। अभिभावकों, शिक्षकों एवं ग्रामवासियों को आशा है कि शीघ्र ही इस संबंध में ठोस और प्रभावी उपाय अमल में लाए जाएंगे।