

Maharashtra Education Department News: महाराष्ट्र सरकार ने मान्यता प्राप्त निजी अनुदानित व अशंतः अनुदानित माध्यमिक व उच्च माध्यमिक स्कूलों के शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के आकृति बंध में किए गए बदलाव के चलते संपूर्ण राज्य में तीव्र नाराजगी निर्माण हो गई है। विशेषतः लिपिक पद मंजूरी के लिए छात्र संख्या व शिक्षक पदों के निकष से जोड़ी हुई शर्त लागू करने से हजारों शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की नौकरी जाने का भय निर्माण हो गया है।
18 फरवरी 2026 के नये सरकार निर्णय अनुसार किमान तीन शिक्षक पद मंजूर होने इतने छात्र संख्या होने पर ही एक कनिष्ठ लिपिक पद मंजूर होगा। जिसका खामियाजा कम पटसंख्या वाले ग्रामीण व दुर्गम क्षेत्र के स्कूलों में लिपिक पदों को मान्यता मिलना मुश्किल होने की चर्चा शुरू है। शिक्षकेत्तर कर्मचारियों में नौकरी जाने का भय 100 फीसदी होकर अनेक परिवारों पर भूखे मरने की नौबत आ सकती है।
ऐसा भय संगठन द्वारा व्यक्त किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य कर्मचारी नियोजन व खर्च नियंत्रण करने का होने पर भी प्रत्यक्ष में इस निर्णय से कर्मचारियों में भय, असुरक्षितता और असंतोष बढ़ गया है। शिक्षा क्षेत्र में स्थैर्य रखने के लिए सरकार को तत्काल संवाद कर हल निकलने की आवश्यकता होने की बात कही जा रही है। गड़चिरोली शिक्षकेत्तर संगठन समेत विभिन्न कर्मचारी संगठन ने तत्काल दोबारा विचार करने की मांग की न लेने पर संपूर्ण राज्य में आंदोलन करने इस निर्णय का तीव्र निषेध करते हुए है। यदि सरकार यह निर्णय तत्काल वापस
की चेतावनी भी दी गई है।
स्कूलों में कार्यालयीन कामकाज, सरकारी पत्रव्यवहार, वेतन बिल, छात्र पंजीयन, परीक्षा प्रक्रिया आदि जैसे जिम्मेदारी कर्मचारियों पर होती है।यदि पद कम किए गए तो सभी बोझ शिक्षकों पर पड़ने की संभावना है। जिससे अध्यापन की गुणवत्ता पर परिणाम होकर शिक्षा व्यवस्था में असंतोष बढ़ सकता है।
गड़चिरोली जिला के जिला कार्यवाहक उदय धकाते ने बताया की सरकार का निर्णय शिक्षकेतर कर्मचारियों का अस्तित्व खतरे में लाने वाला है। इस निकष से अनेक छोटे व ग्रामीण स्कूलों के कर्मचारियों की नौकरियां खतरे में आकर उनके परिवारों पर भूखे मरने की नौबत आ पड़ सकती है। शिक्षा व्यवस्था उचित रखने के लिए शिक्षकेत्तर कर्मचारी आवश्यक है। सरकार तत्काल निर्णय पर दोबारा विचार कर कर्मचारी व शिक्षा क्षेत्र का असंतोष दूर करें, अन्यथा संगठन आंदोलन करेगा।