गड़चिरोली के मूलचेरा में रंगदारी मामले से वन विभाग में हड़कंप, ACB ने एक आरोपी को रंगेहाथ पकड़ा
Gadchiroli Forest Corruption News: मूलचेरा में रंगदारी प्रकरण से वन विभाग में हड़कंप मच गया है। ACB ने 50 हजार रुपये की पहली किश्त लेते समय एक आरोपी को रंगेहाथ पकड़ा, दो वनकर्मी जांच के दायर में हैं।
- Written By: अनन्या तिवारी
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स-AI)
Gadchiroli Forest Department Extortion Case: गड़चिरोली जिले की मूलचेरा तहसील में आने वाले पेडीगुडम वन परिक्षेत्र में रंगदारी मांगने का मामला सामने आने के बाद वन विभाग में खलबली मच गई है। वन परिक्षेत्र अधिकारी श्रीनिवास कटकू, वनरक्षक नितेश मडावी तथा प्रदीप मंडल नामक व्यक्ति पर एक फर्नीचर व्यवसायी से तीन लाख रुपये की मांग करने का आरोप लगाया गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, फर्नीचर व्यवसाय से जुड़े एक व्यक्ति को वन विभाग की कार्रवाई का भय दिखाकर तीन लाख रुपये देने के लिए कथित रूप से दबाव बनाया गया था। मामले से परेशान शिकायतकर्ता ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई।
ACB ने बिछाया जाल, पहली किश्त लेते समय आरोपी गिरफ्तार
शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने मामले की प्रारंभिक जांच की। जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद टीम ने जाल बिछाया। योजना के तहत पहली किश्त के रूप में 50 हजार रुपये दिए जाने थे।
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निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार रकम स्वीकार करते समय एसीबी की टीम ने आरोपी प्रदीप मंडल को रंगेहाथ पकड़ लिया। इस कार्रवाई के बाद वन परिक्षेत्र अधिकारी श्रीनिवास कटकू और वनरक्षक नितेश मडावी की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है। मामले की विस्तृत जांच जारी है।
पुराने विवादों को लेकर भी चर्चा में आए अधिकारी
एसीबी की कार्रवाई के बाद वन परिक्षेत्र अधिकारी श्रीनिवास कटकू से जुड़े पुराने विवाद भी चर्चा में आ गए हैं। सूत्रों के अनुसार, असरअली वन परिक्षेत्र में पदस्थापना के दौरान उन पर बांस बिक्री प्रकरण में गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे थे।
बताया जाता है कि उस समय तत्कालीन उपवन संरक्षक पूनम पाटिल द्वारा उनके विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई की गई थी। इसके अलावा आर्थिक अनियमितताओं और भ्रष्टाचार से संबंधित कई शिकायतें भी समय-समय पर सामने आने की चर्चा रही है। हालांकि इन मामलों की वर्तमान स्थिति की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।
इस घटना के बाद वन विभाग के ईमानदार अधिकारियों और कर्मचारियों की छवि प्रभावित होने की आशंका व्यक्त की जा रही है। जंगलों की सुरक्षा, वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाने वाले विभाग के कुछ कर्मचारियों पर इस प्रकार के आरोप लगना चिंता का विषय माना जा रहा है।
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आलापल्ली वन मंडल में बढ़ी सतर्कता
ACB की कार्रवाई के बाद आलापल्ली वन मंडल में भी सतर्कता का माहौल बताया जा रहा है। विभाग के विभिन्न लंबित मामलों, आर्थिक लेन-देन तथा अन्य प्रशासनिक कार्यों की जांच की संभावना को लेकर अधिकारियों और कर्मचारियों में चर्चा बनी हुई है।
व्यापक और निष्पक्ष जांच की मांग
सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने मांग की है कि जांच केवल एक लेन-देन तक सीमित न रखी जाए। उनका कहना है कि संबंधित अधिकारियों के कार्यकाल के दौरान हुए आर्थिक लेन-देन, वन उपज से जुड़े मामलों तथा पूर्व में की गई शिकायतों की भी स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।
स्थानीय लोगों का मानना है कि एसीबी की इस कार्रवाई से वन विभाग में संभावित भ्रष्टाचार से जुड़े अन्य मामलों का भी खुलासा हो सकता है। फिलहाल पूरे प्रकरण की जांच जारी है और एसीबी की आगामी कार्रवाई पर सभी की नजर बनी हुई है।
