मेक इन इंडिया का नारा फेल? महाराष्ट्र के 57 गांवों का ‘रिमोट कंट्रोल’ छत्तीसगढ़ के पास, जानें क्या है वजह
Maharashtra Chhattisgarh Border: महाराष्ट्र में रहकर भी छत्तीसगढ़ के भरोसे हैं गड़चिरोली के 57 गांव। बांडिया नदी पर पुल न होने से एटापल्ली के ग्रामीण बुनियादी जरूरतों के लिए सीमा पार करने को मजबूर।
- Written By: प्रिया जैस
एटापल्ली (सौजन्य-नवभारत)
Gadchiroli Development: भले ही सरकार मेक इन इंडिय़ा का नारा देकर देश के पिछड़े हिस्सों का विकास करने की बात कह रही है। लेकिन दूसरी ओर महाराष्ट्र राज्य के आखिरी छोर पर बसे गड़चिरोली जिले के आखिरी और दुर्गम क्षेत्र में नागरिकों तक मेक इन इंडिया की पहल अब तक नहीं पहुंच पायी है।
जिसका नतीजा जिले की एटापल्ली तहसील के करीब 57 गांव के नागरिक महाराष्ट्र राज्य में रहते हुए भी अपना प्रतिदिन का व्यवहार तहसील से सटे छत्तीसगढ़ राज्य में करते है। विशेषत: इन गांवों के नागरिक छग के नागरिकों के साथ रोटी-बेटी का व्यवहार भी करते है। इसका प्रमुख कारण सड़क और नदी, नालों पर पुलिया का अभाव होने की बात कही जा रही है।
पुलिया नहीं होने से लोग त्रस्त
एटापल्ली तहसील आदिवासी बहुल और नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में पहचानी जाती है। यह तहसील गड़चिरोली और छत्तीसगढ़ राज्य की सीमा पर बसी है। एटापल्ली तहसील में कुल गांवों की संख्या 197 होकर एटापल्ली और छत्तीसगढ़ राज्य की सीमा पर बांडिया नदी बहती है। कुल गांवों में करीब 57 से अधिक गांव नदी के उस पार बसे है।
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ऐसे में इनमें से अधिकत्तर गांवों में पहुचने के लिए पक्की सड़कें नहीं बन पायी। इसके अलावा बांडिया नदी समेत छोटे-छोटे नालों पर पुलिया नहीं बन पाये है। जिसके कारण इस क्षेत्र के लोग नदी व नाला पार तहसील मुख्यालय तथा अन्य गांवों में जाने के बजाय तहसील की सीमा लांगकर छत्तीसगढ़ राज्य में जाना पसंद कर रहे है।
प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी
एटापल्ली तहसील के जारांवड़ी ग्रापं अंतर्गत आने वाले 4, मानेवारा ग्रापं अंतर्ग 4, जवेली खु. ग्रापं के 10, सोहगांव ग्रापं के 10 वांगेतुरी ग्रापं के 20, मेंढरी ग्रापं के 5 और घोटसुर ग्रापं के 4 सहित कुल 57 गांव एटापल्ली तहसील की सीमा पर बसे है। अधिकत्तर गांव बांडिया नदी के उस पार बसे है।
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नदी पर पुलिया नहीं होने के कारण इन गांवों के नागरिक विभिन्न कार्यों के लिए तहसील मुख्यालय में आने के बजाय छत्तीसगढ़ राज्य में जाकर सामग्री खरीदना और विभिन्न कार्य करते दिखाई दे रहे है। तहसील मुख्यालय में केवल सरकारी कार्यों के लिए ही आते है। वहीं पड़ोस के गांवों में सरकारी अनाज लेने के लिए जाते है।
एटापल्ली तहसील में गांवों का समावेश होने के बावजूद भी प्रशासन और जनप्रतिनिधि इन गांवों का विकास करने की ओर अनदेखी होने के कारण संबंधित गांवों के लोग प्रशासन से किसी भी तरह की उम्मीद लगाना भी छोड़ दिए है। अब केवल तहसील से सटे छत्तीसगढ़ राज्य के गांवों से ही अपना व्यवहार रखना उचित समझ रहे है।
