BJP-NCP-कांग्रेस MLA के सामने 'अस्तित्व की लड़ाई', NCP-SP गुट, UBT और शिंदे सेना चुनाव में नाममात्र

Maharashtra Local Body Elections: निकाय चुनाव के लिए नामांकन तथा छानबीन प्रक्रिया पूरी होने के बाद गड़चिरोली, आरमोरी तथा देसाईगंज नगर परिषद चुनाव का माहौल गरमा गया है।
Maharashtra Local Body Elections: निकाय चुनाव के लिए नामांकन तथा छानबीन प्रक्रिया पूरी होने के बाद गड़चिरोली, आरमोरी तथा देसाईगंज नगर परिषद चुनाव का माहौल गरमा गया है।
निकाय चुनाव (डिजाइन फोटो)
Published on
Updated on

Gadchiroli News: गड़चिरोली में तीनों ही नगर परिषद में भाजपा, राष्ट्रवादी कांग्रेस (अजीत पवार गुट) तथा कांग्रेस इन तीन प्रमुख दलों में त्रिकोणीय मुकाबला स्पष्ट दिखाई दे रहा है। विशेष रूप से राकां पवार गुट, उबाठा एवं शिंदे सेना की सक्रियता कम दिखाई दे रही है, जिसके चलते कार्यकर्ताओं में भ्रम निर्माण हुआ है।

नगर परिषद चुनाव में स्थानीय नेतृत्व की प्रतिष्ठा, संगठन की मजबूती और उम्मीदवार चयन इन तीनों पहलुओं पर चुनावी गणित टीका रहने वाला है। अहेरी विधानसभा क्षेत्र में चुनाव न होने से राष्ट्रवादी (अजीत पवार गुट) ने जिले की तीनों नगर पालिकाओं की संपूर्ण जिम्मेदारी विधायक धर्मराव आत्राम को सौंपी है।

आत्राम का नारा

आत्राम ने शुरुआत से ही ‘स्वबल पर लड़ेंगे’ का नारा देते हुए कई दलों के पदाधिकारियों को अपने पार्टी में शामिल किया। इन प्रवेशों से गड़चिरोली, आरमोरी तथा देसाईगंज में राष्ट्रवादी की ताकत में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है, जिसके चलते राकां के उम्मीदवार मजबूत प्रतियोगी के रूप में उभरकर सामने आए हैं।

गड़चिरोली : भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न

गड़चिरोली नप चुनाव भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का मुद्दा बन गया है। भाजपा विधायक डा। मिलींद नरोटे ने उम्मीदवार चयन से लेकर संपूर्ण प्रचार व्यवस्था तक स्वयं मोर्चा संभाला है। उनकी सक्रियता के बल पर भाजपा यहां मजबूती से टक्कर दे रही है तथा कांग्रेस और राष्ट्रवादी दोनों से कड़ी प्रतिस्पर्धा दिख रही है। पूर्व सांसद अशोक नेते भी मैदान में सक्रिय रहने से भाजपा उम्मीदवारों में उत्साह बना हुआ है।

आरमोरी : भाजपा–कांग्रेस में कड़ा संघर्ष

आरमोरी में भाजपा नेता अरविंद सावकार पोरेड्डीवार तथा प्रकाश सावकार पोरेड्डीवार को चुनाव अभियान की पूरी जिम्मेदारी दी गई है। उनके प्रभाव से भाजपा ने यहां संगठन को मजबूती प्रदान की है। दूसरी ओर कांग्रेस विधायक रामदास मसराम जनसंपर्क के माध्यम से अपने उम्मीदवारों को सशक्त बनाने में जुटे हैं, जिससे आरमोरी में कांग्रेस भी मजबूत दावेदार के रूप में उभर रही है।

देसाईगंज : तीनों दलों के बीच कांटे की टक्कर

देसाईगंज में तीनों ही दलों ने दमदार उम्मीदवार उतारे हैं, जिसके चलते यहां मुकाबला बेहद चुरशीभरा होने की संभावना है। नए प्रवेशों से राष्ट्रवादी को लाभ मिला है, परंतु भाजपा तथा कांग्रेस ने भी अपनी परंपरागत पकड़ बनाए रखने की तैयारी की है। आरमोरी में पूर्व विधायक डा। रामकृष्ण मडावी शिंदे सेना की ओर से मोर्चा संभाल रहे हैं। वहीं गड़चिरोली में राकां शरद पवार गुट ने मनसे तथा उद्धव ठाकरे गुट के साथ गठबंधन अवश्य किया है, लेकिन समन्वय का अभाव होने का आरोप स्वयं कार्यकर्ताओं की ओर से उठाया जा रहा है।

नाराजगी किसके लिए बनेगी घातक

अध्यक्ष पद के लिए सभी दलों में अनेक दावेदार इच्छुक थे, लेकिन भाजपा, कांग्रेस तथा शिंदे सेना ने हाल ही में दलों में शामिल हुए चेहरों को टिकट देकर पुराने निष्ठावान पदाधिकारियों में नाराजगी पैदा कर दी है। यह नाराजगी आधिकारिक उम्मीदवारों के लिए बाधा बन सकती है। गड़चिरोली में भाजपा तथा कांग्रेस दोनों में ही टिकट बंटवारे को लेकर खुली गुटबाजी सामने आई है।

राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि इस गुटबाजी से स्थानीय आघाड़ियों को लाभ मिल सकता है। नगर पालिका चुनाव स्थानीय अस्तित्व की लड़ाई मानी जाती है, इसलिए तीनों विधानसभा क्षेत्रों के विधायकों ने उम्मीदवार चयन में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप किया। दलों के उम्मीदवार इन्हीं विधायकों की रणनीति के आधार पर तय किए गए हैं, जिससे आने वाला परिणाम उनके नेतृत्व की परीक्षा भी साबित होगा।

अनपेक्षित परिणाम की आशंका

गड़चिरोली, आरमोरी तथा देसाईगंज नप में भाजपा, राष्ट्रवादी (अजीत पवार गुट) तथा कांग्रेस के बीच रोमांचक त्रिकोणीय लड़ाई तय मानी जा रही है। स्थानीय जातीय, सामाजिक समीकरण, हालिया पक्षांतर तथा विधायकों का सक्रिय हस्तक्षेप इन सभी कारकों का प्रत्यक्ष असर इस चुनाव पर देखने को मिलेगा। परिणाम किस ओर झुकेंगे, यह अनुमान लगाना कठिन है; लेकिन इतना स्पष्ट है कि तीनों ही दलों के लिए यह चुनाव “अस्तित्व और प्रतिष्ठा” का संघर्ष बन चुका है।

  • नवभारत लाइव के लिए गड़चिरोली से सुरेश नगराले की रिपोर्ट
Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com